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बुधवार, 14 सितंबर, 2005 को 12:33 GMT तक के समाचार
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बिरंची दास के साथ बुधिया सिंह
बिरंची दास बुधिया सिंह की दिनचर्या को नियमित बना चुके हैं
वह लगातार सात घंटे तक दौड़ सकता है, कई बार तो वह 50 किलोमीटर तक की दौड़ लगा सकता है. यह सब उसके लिए आम बात है.

वैसे कुछ लोग हैं जो ऐसा कर सकते हैं, लेकिन बुधिया सिंह की बात ही और है, वे सिर्फ़ साढ़े तीन वर्ष के हैं.

घरों में बर्तन माँजने का काम करने वाली उसकी माँ ने ग़रीबी से तंग आकर इस प्रतिभावान धावक को सिर्फ़ 800 रूपए में बेच दिया था.

उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में रहने वाले बुधिया पर जूडो के कोच बिरंची दास की नज़र पड़ी.

बिरंची दास का कहना है कि उन्होंने दूसरे बच्चों को तंग करने के लिए बुधिया को कई बार डाँट लगाई, एक बार नाराज़ होकर उन्होंने बुधिया को दौड़ लगाने की सज़ा दी और कहा कि जब तक मना न किया जाए वह दौड़ता रहे.

बिरंची बताते हैं, "मैं किसी काम में व्यस्त हो गया जब पाँच घंटे बाद मैं लौटा तो दंग रह गया, वह दौड़ता ही जा रहा था."

दिनचर्या

अपने मुहल्ले के की समिति के अध्यक्ष बिरंची दास ने ख़रीदार को 800 रूपए देकर बुधिया को मुक्त करा दिया है.

स्थानीय जूडो एसोसिएशन के अध्यक्ष बिरंची दास का कहना है कि बुधिया जन्मजात तौर पर विलक्षण है और उसमें अपार ऊर्जा है.

उन्होंने अब बुधिया के लिए बहुत ही अनुशासित दिनचर्या तैयार की है, जिसमें उनके खानपान और अभ्यास का विशेष ध्यान रखा गया है.

बुधिया सिंह अब पढ़ना सीख रहा है

बुधिया को अपनी माँ के साथ रहने पर सिर्फ़ भात ही खाने को मिलता था लेकिन अब उसे अंडे, दूध और माँस सहित संतुलित भोजन दिया जा रहा है.

बिरंची का कहना है कि बेहतर दिनचर्या और आहार की वजह से इस बच्चे की लंबी दूर तय करने की क्षमता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है.

बुधिया रोज़ सुबह पाँच बजे उठकर बिना रूके दोपहर तक दौड़ता रहता है, थोड़ी कसरत और दोपहर के खाने के बाद वह थोड़ी देर के लिए सो जाता है.

सोकर उठने के बाद चार बजे बुधिया की दौड़ फिर से शुरू हो जाती है जो शाम तक चलती है.

भुवनेश्वर के जूडो हॉस्टल में खुशी-खुशी रह रहे बुधिया ने तुतलाते हुए कहा, "मैं यहाँ जी भरकर खा सकता हूँ और जितना चाहे दौड़ सकता हूँ."

अभी वह उड़िया वर्णमाला के पहले अक्षर सीख रहा है और उसे ठीक से बोलना भी नहीं आता.

बुधिया के कोच बिरंची दास का कहना है कि वे चाहते हैं कि उसका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराएँ, उन्हें उम्मीद है कि उनका यह सपना ज़रूर पूरा होगा.

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