|
माफ़ी माँगकर खुराना भाजपा में वापस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मदनलाल खुराना को पार्टी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी से बिना शर्त माफी मांगने के बाद पार्टी में वापस ले लिया गया है. मदनलाल खुराना को सात सितंबर को पार्टी को आडवाणी के नेतृत्व पर सवाल उठाने के लिए निष्कासित कर दिया था. उस दौरान उन्होंने कहा था कि वो आडवाणी के नेतृत्व में काम नहीं कर सकते हैं. कई दिनों की राजनीतिक गतिविधियों और अटल बिहारी वाजपेयी के खुराना के समर्थन में आने के बाद सोमवार को खुराना को पार्टी में वापस ले लिया गया. पार्टी महासचिव प्रमोद महाजन ने इस बारे में संवाददाताओं को बताया कि खुराना ने पार्टी अध्यक्ष से सशर्त माफी मांगी है. महाजन के अनुसार खुराना ने अपने पत्र में कहा " मैंने पिछले कुछ दिनों में सार्वजनिक रुप से आपके (आडवाणी) खिलाफ़ जो बयान दिए हैं वो मुझे नहीं देने चाहिए थे. इन बयानों से पार्टी को नुकसान पहुंचा है और आपको मानसिक कष्ट हुआ. मैं इसके लिए खेद प्रकट करता हूं और इन बयानों को वापस लेता हूं. " महाजन ने कहा कि इस पत्र के बाद पार्टी ने खुराना को वापस लेने का फैसला किया है. वाजपेयी का समर्थन भाजपा अध्यक्ष आडवाणी के नेतृत्व को लेकर कई महीनों से विवाद चल रहा है और खुराना प्रकरण इसकी अगली कड़ी मात्र थी.
खुराना को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने के फैसले का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खुलकर विरोध किया था जिसके बाद एक बार फिर अटल और आडवाणी आमने सामने थे. खुराना के निष्कासन के बाद उनके समर्थन में दिल्ली के केवल तीन विधायक आए थे जिसके बाद लग रहा था कि वो पार्टी में अलग थलग हो जाएंगे लेकिन एक दिन बाद ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने खुराना का पुरज़ोर समर्थन कर दिया. इसके बाद कई दिनों तक मंत्रणाओं का दौर चला और भाजपा को अपनी साख बचाने के लिए रास्ते खोजने पड़े. जानकारों का कहना है कि खुराना की वापसी से आडवाणी का पक्ष और कमज़ोर हो गया है. इसे खुराना संकट की समाप्ति कहा जा सकता है लेकिन आडवाणी के नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद की इति नहीं माना जा सकता. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||