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'भूत' बनना रोज़ी-रोटी का ज़रिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नाम-गोपाल हालदार, उम्र- 60 साल. पेशा-भूत बनना. ऐसा बायोडाटा पढ़कर चौंकना स्वाभाविक है लेकिन मुलाकात होने पर लगता है कि बायोडाटा एकदम सही है. अब उनका वजन भी जान लीजिए. उनका वज़न है पूरे 24 किलो. उनकी नरकंकाल जैसी काया ने उनको दक्षिण 24-परगना जिले के पाकुड़तला गाँव में चलता-फिरता भूत बना दिया है. वे बरसों से मेले और नाटकों में भूत बनते आ रहे हैं. मेकअप में उनको देख कर यह बताना मुश्किल है कि वे आदमी हैं या सचमुच के भूत. शक्ल-सूरत और बनावट ऐसी कि कम रोशनी में सामने पड़ जाएँ तो बच्चे तो बच्चे, बड़े भी काँप उठें. गोपाल कहते हैं कि "बचपन से ही दो जून ठीक से खाना नहीं मिलने के कारण मैं कुपोषण का शिकार हो गया. जब खाने के लिए पैसे नहीं थे तो डाक्टर को कहां से दिखाता? पैसों की कमी से ही अपने दो बेटों को पढ़ा-लिखा नहीं सका." पेट के लिए काम तो करना ही पड़ता ही है. दूर-दूर से नाटकों में भूत की भूमिका निभाने के प्रस्ताव मिलते हैं. वे जाते भी हैं. दरअसल, बरसों से यही उनका मुख्य पेशा बन गया है. लेकिन उस भूमिका के बदले में रोजाना तीस रुपए ही मिलते हैं. खाना-पीना मिल जाता है. समस्या क्या अपनी शारीरिक बनावट और वजन कम होने के कारण कभी कोई दिक्कत नहीं हुई? वे बताते हैं कि "नहीं. जीवन में हर काम किसी सामान्य आदमी की तरह ही किया. अब तक कभी कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई. शादी हुई. दो बेटे भी हुए. अब बड़े बेटे की भी शादी हो चुकी है. पत्नी मालती हालदार और दोनों बेटे दूसरे के खेतों में काम करते हैं. मेरे पास जमीन का एक छोटा-सा टुकड़ा है." गोपाल की पुत्रवधू वंदना बताती है कि "पापा को नींद की कोई समस्या नहीं है. लेकिन खाना-पीना काफी कम हो गया है. सुबह और रात में रोटी या मुढ़ी खा लेते हैं." वहीं बैठे गोपाल बताते हैं कि "कमजोरी के कारण कभी-कभी चक्कर आते हैं. लेकिन कभी किसी डाक्टर को नहीं दिखाया है." 'असली भूत' इलाके में भूत का पर्याय बन चुके गोपाल बताते हैं कि "लोग कहते हैं कि मैंने भूतों को अपने कब्जे में कर रखा है. वही लोग मुझे असली भूत जैसा बना देते हैं. इतने लंबे अरसे से भूत बन रहा हूं कि अब तो कभी-कभी लगता है कि मैं सचमुच भूत ही हूं."
वे कहते हैं कि "साल में छह महीने भूत बनने की भूमिका मिलती है. तब कुछ पैसे मिल जाते हैं. बाकी समय तो खेतों में काम करते या बैठकर शतरंज खेलने में ही बीतता है. लेकिन भूत का मेकअप करने के बाद खासकर बच्चे और महिलाएँ देखकर काफी डर जाते हैं." गोपाल के पास एक छोटे से बॉक्स में भूत के मेकअप का सामान है. मेकअप कर भूत बनने में उनको महज दस मिनट लगते हैं. उसके चाचा अतुल हालदार और गांव के दूसरे लोग बताते हैं कि "बचपन से ही उसकी शक्ल भूत जैसी है. उसकी मां भी दुबली-पतली ही थी." स्थानीय चिकित्सक अब्दुल हसन इस बारे में पूछने पर बताते हैं कि "कुपोषण के अलावा हॉर्मोन की कमी या आनुवांशिक कारणों से भी किसी वयस्क व्यक्ति की उम्र 24 किलो से कम हो सकती है. पूरी जांच के बिना कुछ कहना संभव नहीं है." लेकिन गोपाल बाबू को चिकित्सकों की बातों की कोई फिक्र नहीं है. वे तो भूत बनने के लिए नदिया ज़िले के एक मेले में जाने की तैयारी में जुटे हैं. |
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