BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 18 जून, 2005 को 09:11 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
वाराणसी का पिशाच-मोचन मोहल्ला

एक लड़की का इलाज करता एक तांत्रिक
यहाँ इलाज की शुरुआत इस अंधविश्वास के साथ होती है कि व्यक्ति प्रेतबाधा का शिकार है
वाराणसी का पिशाच मोचन मोहल्ला ऐसा मोहल्ला है जहाँ दुनिया की हर बीमारी के इलाज और हर समस्या के हल का दावा किया जाता है.

शर्त इतनी है कि इसके लिए आपको यह मान लेना होगा कि आप पर किसी प्रेत या पिशाच का साया है. और आप तांत्रिकों के हाथों हर तरह के इलाज के लिए तैयार हैं.

इसमें गाली गलौज हो सकती है, मार-पीट हो सकती है और इलाज के नाम पर कोई भी इंजेक्शन हो सकता है.

आश्चर्य यह है कि वहाँ लोगों की भीड़ लगी हुई है और इलाज जारी है.

पिशाच, प्रेत यानी भूत.

भूत, जैसा कि अंधविश्वास है कि व्यक्ति के मरने के बाद की योनि, और बताया जाता है कि पिशाच या प्रेत हमेशा परेशान ही करते हैं.

और यदि 'पिशाच-मोचन' कहें तो ज़ाहिर है कि पिशाच से मुक्ति का उपाय.

वाराणसी में तो बाक़ायदा एक 'पिशाच-मोचन' मोहल्ला ही है.

वैसे तो यह मोहल्ला पुराने समय में मृत्यु के पश्चात होने वाली सभी प्रकार की धार्मिक क्रियाओं का पूर्वी उत्तर-प्रदेश में एक प्रमुख केन्द्र रहा है.

श्राद्ध और आत्मा की शांति के लिए होने वाले सभी विधि- विधान यहाँ सम्पन्न होते हैं.

 सबकी अपनी अलग पहचान है. जैसे कि बॉसुरी सदा साथ रखने वाले बॉसुरी बाबा, कुछ विदेशी भी जिनके भक्त हैं वे हैं अमरीकन बाबा, बड़ी जटा रखने वाले जटा बाबा आदि

लेकिन अब यहॉ भूत-प्रेत से मुक्ति के साथ ही तमाम तरह की बीमारियों का कथित रुप से इलाज भी होने लगा है.

और ये इलाज करते हैं यहाँ के तांत्रिक और बाबा. वह भी शर्तिया.

सभी बिमारियों का इलाज का दावा करने वाले लोग तॉत्रिक, अथवा बाबा के नाम से जाने जाते हैं.

और इन सबकी अपनी अलग पहचान है. जैसे कि बॉसुरी सदा साथ रखने वाले बॉसुरी बाबा, कुछ विदेशी भी जिनके भक्त हैं वे हैं अमरीकन बाबा, बड़ी जटा रखने वाले जटा बाबा आदि.

मजबूरी में इलाज

पिशाच मोचन मोहल्ले का नाम ऐसा बड़ा हो गया है कि ये बाबा अब इस मोहल्ले से जुड़े इलाक़ों में भी अपना ठिकाना बनाने लगे हैं.

इन तांत्रिकों के यहाँ पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी शहरों, ख़ासकर ग्रामीण क्षेत्रों से और सभी उम्र के लोग आते हैं जिनमें महिलाओं की बहुतायत होती है.

यहॉ आने अधिकतर लोग वो होते हैं जो पुरानी रुढ़ियों में जकड़े हुए अंधविश्वासी हैं.

 मुझे ख़ुद तांत्रिकों पर कोई भरोसा नहीं है पर घर वालों की इच्छा और अस्पताल की अपेक्षा बेहद सस्ता इलाज होने के कारण मैं यहॉ आती हूँ
सुनीता मनोहर, मधुमेह की मरीज़

या फिर वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अस्पतालों का मँहगा इलाज इनके बस के बाहर है या लंबे इलाज के बाद हारकर तांत्रिक की शरण में आ गए हैं.

इस तरह कई बार तन्त्र-मन्त्र पर विश्वास से ज़्यादा इनकी मजबूरी यहॉ ले आती है.

ज़िला मिर्ज़ापुर की रहने वाली 26 वर्ष की सुनीता मनोहर विगत दो वर्षों से एक तान्त्रिक से मधुमेह का इलाज करवा रही हैं.

उनका कहना है, "मुझे ख़ुद तांत्रिकों पर कोई भरोसा नहीं है पर घर वालों की इच्छा और अस्पताल की अपेक्षा बेहद सस्ता इलाज होने के कारण मैं यहॉ आती हूँ."

वहीं 47 वर्ष के राजू पासी को तान्त्रिक बाबा पर पूरा भरोसा है बाबा के कथित इलाज से राजू का शराब पीना छूट गया.

मारपीट और गाली गलौज

जहॉ तक तान्त्रिकों का प्रश्न है खुद उनका विश्वास तंत्र-मंत्र से ज्यादा मार-पीट और गाली-गलौज में दिखाई देता है.

एक लड़की का इलाज करता एक तांत्रिक
भूत भगाने के लिए लातों का प्रयोग आमतौर पर तांत्रिक करते ही हैं

वे हर बीमार का इलाज यही मानकर करते हैं कि वे किसी प्रेत बाधा के शिकार हैं.

पुरुषों के हाँथ- पाँव बाँध कर बर्बरता पूर्वक पिटाई इलाज का सबसे प्रचलित तरीक़ा है.

महिलाओं की स्थिति तो और भी शोचनीय है.

पीठ पर ईंट रख कर घण्टों बैठाए रखना, लातों से और डंडे से पिटाई, थोड़ा भी विरोध करने पर तांत्रिकों का धारा-प्रवाह गाली देना आम सी बात है.

परिवार के अन्य सदस्य यह सब देखते सुनते हैं लेकिन वे मरीज के ठीक होने की आशा में ये सब कुछ सहते हैं.

वैसे भी तांत्रिक उन्हें बताता है कि वे मरीजों को नहीं बल्कि पिशाच को प्रताड़ित कर रहा है.

ख़तरनाक इलाज

आजकल तांत्रिकों ने इंजेक्शन का प्रयोग भी धड़ल्ले से करना शुरु कर दिया है.

उन्हें दवाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन वे हर बीमारी का इलाज कर रहे हैं.

तांत्रिकों के द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले इन्जेक्शन न केवल पुराने, धूल गन्दगी मे पड़े रहने के कारण प्रदूषित होते हैं बल्कि एक ही इन्जेक्शन, और सूई का प्रयोग रोजाना अनेकों मरीजों के ऊपर किया जाता है.

ऐसे लगाई जाती है सुई
इन्जेक्शन के प्रयोग का तरीक़ा और भी अचरज भरा और आपत्तिजनक है क्योंकि लगभग सभी तॉत्रिक कपड़ों के ऊपर से ही इन्जेक्शन लगाने में विश्वास रखते हैं

वह भी बिना विसंक्रमित किए.

इन्जेक्शन के प्रयोग का तरीक़ा और भी अचरज भरा और आपत्तिजनक है क्योंकि लगभग सभी तॉत्रिक कपड़ों के ऊपर से ही इन्जेक्शन लगाने में विश्वास रखते हैं.

इस प्रकार से पता नहीं कितने लोग इलाज के नाम पर संक्रमित सुइयों, इंजेक्शन का शिकार हो रहे है.

इस प्रकार के इन्जेक्शन के प्रयोग से रोगियों को कितना लाभ होता है ये तो पता नहीं लेकिन हो सकता है कि यह एड्स जैसी बीमारी के प्रसार का एक बड़ा कारण बन रहा हो.

आश्चर्य यह है कि इन सबको लेकर प्रशासन चुप है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>