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नेत्र चिकित्सकों ने 'नैना' का विरोध किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में नेत्र चिकित्सकों ने 'नैना' फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है. इस फ़िल्म में नायिका आँखों में कॉर्निया प्रतिरोपण के बाद भूत दिखने लगते हैं. भारतीय नेत्र चिकित्सा सोसायटी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में फ़िल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की अपील करते हुए कहा है कि यह लोगों को नेत्रदान करने या कॉर्निया प्रतिरोपित कराने से रोकेगी. सोसायटी के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राजवर्द्धन आज़ाद ने कहा कि 'नैना' अंधविश्वासों से भरे भारतीय समाज में नेत्रदान की परंपरा को हतोत्साहित करने वाली है. चिकितिस्कों को डर है कि यह फ़िल्म अंधविश्वासी लोगों में डर पैदा कर सकती है कि दान दी गई आँखें उनके मरने के बाद भी जीवित रहेंगी. भारतीय नेत्र चिकित्सा सोसायटी ने अफ़सोस जताया है कि एक ओर तो ऐश्वर्या राय और शर्मिला टैगोर जैसी अभिनेत्रियाँ लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने के अभियानों में भाग लेती हैं, वहीं यह फ़िल्म नेत्रदान के बारे में नए अंधविश्वासों को हवा देती है. उल्लेखनीय है कि शर्मिला टैगोर ही इस समय भारतीय फ़िल्म सेंसर बोर्ड की प्रमुख हैं. कल्पना की उड़ान शुक्रवार को पूरे देश में रिलीज़ इस फ़िल्म की नायिका उर्मिला मातोंडकर कॉर्निया प्रतिरोपित कराने के बाद बीस वर्षों से ग़ायब आँखों की रोशनी वापस पा लेती है, लेकिन इसी के साथ उसे मर चुके लोग भी दिखने लगते हैं. रिपोर्टों के अनुसार 'नैना' के निर्देशक श्रीपाल मोरखिया ने विवाद को ग़ैरज़रूरी बताते हुए कहा है कि यदि कहानी में कल्पना की उड़ान नहीं हो तो फिर कोई डरावनी फ़िल्म बनाई ही नहीं जा सकती है. अदालत बुधवार को भारतीय नेत्र चिकित्सा सोसायटी की याचिका पर सुनवाई करेगी. |
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