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आंध्र में नक्सली गुटों पर फिर पाबंदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रतिबंध हटाने के एक साल और शांतिवार्ता की असफलता के बाद आँध्र प्रदेश सरकार ने एक बार फिर विद्रोही माओवादी या नक्सली संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. केंद्र सरकार की मंज़ूरी मिलने के बाद आँध्र की कांग्रेस गठबंधन सरकार ने इस प्रतिबंध की घोषणा की है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) सहित छह अन्य प्रतिनिधि संगठनों पर सरकार ने यह प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है. प्रतिबंध का यह फ़ैसला कांग्रेस विधायक सहित दस लोगों की नक्सलियों द्वारा की गई हत्या के बाद किया गया है. पिछले साल 21 जुलाई को राज्य सरकार ने इन संगठनों से प्रतिबंध हटाने का फ़ैसला कर उनसे शांतिवार्ता शुरु की थी. इस साल के शुरु में नक्सली संगठनों से बातचीत पूरी तरह टूट गई थी. फ़ैसला मंगलवार को आँध्र प्रदेश मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी को नक्सली संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए थे. इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से भी नक्सली या माओवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले का समर्थन किया गया. इसके बाद मुख्यमंत्री रेड्डी ने प्रतिबंध के फ़ैसले पर हस्ताक्षर कर दिए. आँध्र प्रदेश में दूसरी बार इन संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है. इससे पहले 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन जनार्दन रेड्डी ने प्रतिबंध लगाया था. राज्य में कांग्रेस गठबंधन वाली मौजूदा सरकार ने इस प्रतिबंध को 12 साल बाद ख़त्म किया और उनसे बातचीत की शुरुआत की लेकिन पहले दौर की शांतिवार्ता से बात आगे नहीं बढ़ पाई. सरकार की ओर से शर्त लगाई गई थी कि नक्सली संगठन के कार्यकर्ता हथियार छोड़ दें और वे इसके लिए तैयार नहीं थे. इस साल जनवरी में बातचीत पूरी तरह टूट गई जब पुलिस कार्रवाई में चार माओवादी नेताओं की मौत हो गई. |
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