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मदरसे से पढ़े लोग नहीं लड़ सकेंगे चुनाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में स्थानीय निकाय के चुनाव में मदरसों से पढ़ाई करनेवाले लोगों के चुनाव ल़ड़ने पर लगी रोक बरक़रार रखी है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी लगभग एक दर्जन याचिकाओं को ठुकरा दिया जिनमें मदरसों से शिक्षा पाए लोग चुनाव लड़ने की अनुमति चाहते थे. पाकिस्तान में स्थानीय निकायों के चुनाव में मदरसे से शिक्षा प्राप्त करनेवाले लोगों की भागीदारी का ये मामला पिछले महीने से ही विभिन्न अदालतों में चलता रहा था. एक अदालत ने रोक को सही बताया था तो एक को ग़लत लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अब लगता नहीं कि मदरसे से पढ़े लोग चुनाव में खड़े हो सकेंगे. पाकिस्तान में गुरूवार को स्थानीय निकायों के पहले चरण के चुनाव होने हैं. दूसरे और अंतिम चरण का चुनाव 25 अगस्त को होगा. पाकिस्तान में परवेज़ मुशर्रफ़ के सत्ता में आने के बाद दूसरी बार स्थानीय निकायों के चुनाव हो रहे हैं. मामला पाकिस्तान के चुनाव क़ानून के अनुसार केंद्र और प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव लड़ने के लिए किसी उम्मीदवार के पास युनिवर्सिटी की डिग्री होनी ज़रूरी है. वहीं स्थानीय निकायों के चुनाव लड़ने के लिए एक उम्मीदवार के पास माध्यमिक स्कूल की डिग्री होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में ये आग्रह किया गया था कि मदरसों से प्राप्त डिप्लोमा को माध्यमिक स्कूल के सर्टिफ़िकेट के समकक्ष माना जाए लेकिन मुख्य न्यायाधीश समेत तीन न्यायाधीशों के पीठ ने अपील नामंज़ूर कर दी. ये मामला सबसे पहले शुरू हुआ पंजाब प्रांत से जहाँ के चुनाव अधिकारियों ने मदरसों से पढ़ाई करनेवाले उम्मीदवारों के नामांकन पत्र ख़ारिज़ कर दिए. मामला लाहौर हाईकोर्ट में गया जिसने रोक को सही ठहराया. लेकिन फिर पाकिस्तान के सरहदी सूबे में पेशावर हाईकोर्ट ने ऐसे उम्मीदवारों के पक्ष में फ़ैसला सुनाया. पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य पीठ ने दो उम्मीदवारों को ये कहते हुए चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी थी कि अंतिम फ़ैसला बाद में आएगा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के फ़ैसले के बाद समझा जा रहा है कि मदरसों से पढ़ाई करनेवाले अन्य याचिकाकर्ताओं की अपील भी ठुकरा दी जाएगी. |
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