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मदरसों पर फ़ैसला लागू होगा: अज़ीज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने ज़ोर देकर कहा है कि सरकार देश के मदरसों में पढ़ने आए विदेशी छात्रों को वापस भेजने के फ़ैसले पर क़ायम है. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान के तहत पिछले सप्ताह राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने यह घोषणा की थी. लेकिन मुशर्रफ़ की घोषणा का मदरसों के साथ-साथ देश के कई राजनीतिक दल भी विरोध कर रहे हैं. लंदन में हुए धमाकों के बाद पाकिस्तानी मदरसों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे क्योंकि कहा गया कि संदिग्ध हमलावरों में से एक ने पाकिस्तानी मदरसे में पढ़ाई की थी. प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने विदेशी छात्रों का वीज़ा ख़त्म करने के बारे में सरकार का रुख़ की जानकारी दी और कहा कि यह फ़ैसला अडिग है. विरोध हालाँकि इससे पहले सरकार में शामिल मुख्य पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता चौधरी शुजात हुसैन ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से अपील की थी कि वे अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करें.
पाकिस्तान की सरकार का आकलन है कि इस समय वहाँ क़रीब 1400 विदेशी छात्र विभिन्न मदरसों में पढ़ रहे हैं. पाकिस्तानी मदरसों पर ये आरोप लगे थे कि वहाँ चरमपंथ को बढ़ावा दिया जाता है और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने विदेशी छात्रों को निकाले जाने की घोषणा करते हुए कहा था कि वे ऐसा नहीं चाहते. लेकिन मुशर्रफ़ की इस घोषणा पर काफ़ी बवाल मचा. क़रीब 10 हज़ार मदरसों का नियंत्रण करने वाली संस्था वफ़ाक़-उल-मदारिस के प्रवक्ता मौलाना वली ख़ान ने कहा, "हम जानते थे कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों को ख़ुश करने के लिए यह क़दम उठा सकते हैं." पाकिस्तान के मदरसों में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों का कहना है कि उनसे किसी को ख़तरा नहीं है. हालाँकि अभी ये पता नहीं चल पाया है कि मुशर्रफ़ की यह नीति लागू कब होगी. |
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