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महाराष्ट्र: बाढ़ के बाद बीमारियों का क़हर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र में दूषित पानी से उत्पन्न हुई बीमारियों के कारण पिछले एक सप्ताह में कम से कम 70 लोगों की मौत हो गई है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पाँच हज़ार से अधिक लोग तेज़ बुखार और हैजे से पीड़ित हैं. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर मौतें जानवरों से फैलनेवाली बीमारी लेप्टोस्पीरोसिस के कारण हुईं हैं. ख़बरों के अनुसार कुछ अस्पताल बड़ी संख्या में आ रहे मरीज़ों को नहीं संभाल पा रहे हैं और बिस्तर खाली न होने के कारण कुछेक मरीज़ों को ज़मीन पर लिटाया जा रहा है. समाचार एजेंसी एएफ़पी ने स्वास्थ्य अधिकारी पी डोके के हवाले से कहा है, '' तेज़ बुखार के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं.'' कुछेक इलाक़ों के निवासियों और नगरपालिका कर्मचारियों की बीच सफ़ाई को लेकर टकराव भी हुआ है. लोगों का कहना है कि इलाक़ों से कूड़ा नहीं हट रहा और बीमारियाँ फैल रही हैं. दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि जो प्रयास संभव हैं, वे वह कर रहे हैं. प्रशासन ने बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए 300 टीमों को तैनात किया है. महाराष्ट्र में भारी बारिश और बाढ़ के कारण लगभग एक हज़ार लोगों की मौत हुई है. लेप्टोस्पीरोसिस माना जा रहा है कि मुंबई में ज़्यादातर मौतें लेप्टोस्पीरोसिस नामक बीमारी के कारण हुईं हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में तेज़ बुखार आता है और यह जानवरों ख़ासकर चूहे के मूत्र से फैलती है. मुंबई के कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी जयंत तेलंग ने बीबीसी को बताया कि पिछले साल मॉनसून के बाद 138 लोग लेप्टोस्पीरोसिस से पीड़ित हुए थे और इनमें से 11 लोगों की मौत हो गई थी. लेप्टोस्पीरोसिस मॉनसून के दौरान फैलती है और इसमें बुखार, ठंड, पेट में दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत होती है. कुछेक मामलों में गुर्दा और फेफड़ा प्रभावित हो जाता और पीड़ित व्यक्ति की मौत तक हो जाती है. लेप्टोस्पीरोसिस के संदेहवाले ज़्यादातर लोग झोपड़ पट्टियों में रहते हैं जहाँ बाढ़ और सीवर का पानी घरों में घुस गया था. |
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