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सोमवार, 08 अगस्त, 2005 को 15:49 GMT तक के समाचार
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'लोगों की तक़लीफ़ कम हो सकती थी'

विलासराव देशमुख
विलासराव देशमुख का कहना है कि मुँबई के विकेंद्रीकरण के बारे में सोच विचार की ज़रूरत है
मुंबई में आई भारी बारिश और उससे मची तबाही पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने माना है कि लोगों की तकलीफ़ें कम की जा सकती थीं.

बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में विलासराव देशमुख ने बताया कि आपदाओं से निपटने के लिए लोकसभा में एक विधेयक आया है जिसके तहत देश और राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बनेगा.

एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जाएगी कि लातूर के भूकंप के बाद बने आपदा प्रबंधन सेल के लोग आपदा में क्या कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि पिछले 50 सालों में जो भी निर्णय मुँबई के लिए हुए हैं उन पर सोच विचार की ज़रूरत है.

बचाव

राहत कार्यों के दौरान कोताही बरतने के आरोपों पर अपना बचाव करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया ने ये दिखाने की कोशिश की कि कोई एक व्यक्ति इसके लिए ज़िम्मेदार है.

उन्होंने कहा, “ मैं मानता हूँ कि कप्तान होने के नाते मैं इस ज़िम्मेदारी को छोड़ना नहीं चाहता हूँ. अवश्य ही यह मेरी जिम्मेदारी है क्योंकि मैं राज्य का मुख्यमंत्री हूँ.”

मुंबई महानगर पालिका की भूमिका पर उन्होंने कहा कि दैनिक कामकाज में मुख्यमंत्री का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता.

उनका कहना था कि नीतियाँ बनाने में हम ज़िम्मदार हैं पर लागू करने के लिए तो संस्था है लेकिन संस्था के पदाधिकारी कभी रास्ते पर दिखाई नहीं देते.

विकेंद्रीकरण

मुंबई को सुचारू रूप से चलाए जाने पर विलासराव देशमुख ने कहा कि इसके विकेंद्रीकरण के बारे में गंभीरता से सोचना होगा.

उन्होंने कहा कि क्या व्यवस्था बननी चाहिए और किस रूप में बननी चाहिए इसपर विस्तार से चर्चा हो सकती है.

बाढ़ प्रभावितों को दी जाने वाली मदद के बारे में विलासराव देशमुख ने बताया कि हर बाढ़ प्रभावित को 20 किलो अनाज, 10 लीटर मिट्टी का तेल और 5 हज़ार रूपए नकद दिया जा रहा है.

इसके अलावा उन्होंने बताया कि सरकार निजी कारोबार करने वालों की भी सहायता करेगी जिनका बाढ़ के दौरान नुक़सान हुआ है.

उन्होंने कहा , “ हमने बीमा कंपनियों से कहा है कि जिन लोगों ने बीमा राशि की माँग की है उन्हें जल्द उपलब्ध कराया जाए. हमने राष्ट्रकुल, रिज़र्व बैंक और नाबार्ड को भी कहा है कि जिन लोगों ने बैंक से लोन लिया है, वो पाँच साल के लिए आगे बढ़ा दिया जाए.

विलासराव देशमुख ने बताया कि केंद्र से एक हज़ार करोड़ की मदद और दो सौ करोड़ का अनाज मिला है.

ये पूछे जाने पर कि क्या मुंबई में झुग्गियाँ हटाने का फ़ैसला राजनीतिक लाभ के लिए बदला गया तो उन्होंने कहा कि हमने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि वर्ष 2000 तक की झुग्गियों को संरक्षण दिया जाएगा और इसीलिए इसे रोकना पड़ा.

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