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महाराष्ट्र में लोगों को राहत का इंतज़ार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र में पिछले हफ़्ते आई बाढ़ से अब तक 1.023 मौतें हो चुकी हैं और आशंका है कि ये संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि कई लोग अभी भी लापता हैं. अभी भी एक बाँध में पानी चढ़ा हुआ है और इससे भी मुंबई को ख़तरा हो सकता है. राहत कार्य तेज़ कर दिए गए हैं, सड़क मार्ग खुल रहे हैं और वायुमार्ग खोल दिए गए हैं लेकिन लोगों को अभी राहत का इंतज़ार है. बाढ़ पीड़ित इलाक़ों में अभी भी बीमारी फ़ैलने का ख़तरा मंडरा रहा है. बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद के अनुसार दीवा में हालत सबसे ख़राब थी. यह 22 छोटे-छोटे गाँवों का समूह है जो बाढ़ के दौरान पूरी दुनिया से कट गया था और वहाँ पहुँचना अभी भी बेहद कठिन है. सरकारी आँकड़ों के हिसाब से वहाँ 22 लोगों की मौत हुई थी लेकिन वहाँ रह रहे दस हज़ार लोग अभी भी भारी परेशानी में हैं. उनका लगभग सब कुछ बारिश में बह गया है और उनको अब डर सता रहा है कि वहाँ बीमारी ने फैल जाए. ऐसे ही एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने बीबीसी से कहा, "जो कपड़े हमने पहन रखे हैं हमारे पास बस वही बचा है." यहाँ के लोगों ने बचने के लिए रेलवे स्टेशन का सहारा लिया था. कुछ परिवार अभी भी वहाँ खड़ी एक ट्रेन में गुज़ारा कर रहे हैं. बुधवार की शाम जब बीबीसी टीम वहाँ पहुँची उसके कुछ घंटों पहले ही सरकारी राहत वहाँ पहुँची थी और दो सौ लोगों के लिए कुछ दस किलो चावल दिए गए थे. ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ़ इस इलाक़े और इसी गाँव की कहानी है अरब सागर के किनारे ऐसे सैकड़ों गाँव हैं जो इसी तरह की परिस्थितियों में हैं. |
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