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महाराष्ट्र में बुखार से 66 लोगों की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र में संक्रमित पानी से हुई बीमारियों के कारण पिछले एक सप्ताह में 66 लोगों की मौत हो गई है. जबकि मुंबई में 37 लोगों की मौत हुई है. महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री विमल मूंदडा ने बीबीसी को बताया कि मुंबई में 37 मौतें हुईं हैं और बाकी की इससे सटे थाणे ज़िले में हुई हैं. एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि माना जा रहा है कि ये मौतें लेप्टोस्पीरोसिस नामक बीमारी के कारण हुईं. डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में तेज़ बुखार आता है और यह चूहे के मूत्र से फैलती है. महाराष्ट्र में भारी बारिश और बाढ़ के कारण लगभग एक हज़ार लोगों की मौत हुई है. मुंबई नगरपालिका के प्रवक्ता डीबी शिवजातिक ने बीबीसी को बताया कि पिछले कुछ दिनों में 250 से अधिक लोगों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. उनका कहना था,'' सभी तेज़ बुखार से पीड़ित हैं और लेप्टोस्पीरोसिस का संदेह व्यक्त किया जा रहा है. लेकिन महामारी जैसी कोई स्थिति नहीं है.'' मामलों में वृद्धि मुंबई के कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी जयंत तेलंग ने बीबीसी को बताया, '' बुखार के मामलों में वृद्धि चिंता का विषय है.'' उनका कहना था कि पिछले साल मॉनसून के बाद 138 लोग लेप्टोस्पीरोसिस से पीड़ित हुए थे और इनमें से 11 लोगों की मौत हो गई थी. डॉक्टर तेलंग का कहना था कि हर मॉनसून के बाद लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित होते हैं. उनका कहना था कि इस मॉनसून के बाद दूषित जल से उत्पन्न बीमारियों से पीड़ित लगभग 80 लोग अस्पतालों में भर्ती किए गए. लेप्टोस्पीरोसिस मॉनसून के दौरान फैलती है और इसमें बुखार, ठंड, पेट में दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत होती है. कुछेक मामलों में गुर्दे, फेफड़े को नुक़सान हो जाता है और मौत तक हो जाती है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लेप्टोस्पीरोसिस के संदेहवाले ज़्यादातर लोग झोपड़ पट्टियों में रहते हैं जहाँ बाढ़ और सीवर का पानी घरों में घुस गया था. |
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