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'अयोध्या हमले में लश्कर का हाथ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश पुलिस ने दावा किया है कि पाँच जुलाई को अयोध्या में विवादित परिसर के पास पाँच जुलाई को हुए हमले में चरमपंथी गुट लश्करे तैबा का हाथ था. प्रदेश के पुलिस महानिदेशक यशपाल सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में पत्रकारों को बताया कि हमला करने वाले चरमपंथी अगस्त, 2004 में पाकिस्तान से दिल्ली आए थे और वहीं रह रहे थे. पुलिस महानिदेशक ने कहा कि विस्फोटक सामग्री जम्मू के पुंछ इलाक़े से पानीपत तक एक जीप में लाई गई थी लेकिन उसे फ़ैजाबाद तक कैसे लाया गया इसकी अभी छानबीन की जा रही है. यशपाल सिंह ने बताया कि मृतकों में दो की ही शिनाख्त हो पाई है. इनमें से एक यूनुस और दूसरा अरशद अली के नाम से दिल्ली में रह रहा था. पुलिस का कहना था कि हमले में आरडीएक्स का नहीं बल्कि टीएनटी नाम के विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था. उनका कहना था कि हमलावर मई से सुल्तानपुर और फ़ैजाबाद आ-जा रहे थे और उन्होंने सुल्तानपुर से मोबाइल फ़ोन का सिम कार्ड ख़रीदा था. गिरफ़्तारी इसके पहले जम्मू कश्मीर पुलिस ने कहा कि पुंछ और राजौरी ज़िलों से दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है जिन पर संदेह है कि उन्होंने अयोध्या में हुए हमले में मदद की थी.
राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसपी वैद ने बीबीसी को बताया कि गिरफ़्तार किए गए लोगों से पूछताछ के बाद "ऐसा लगता है कि अयोध्या में विवादित स्थल के पास किए गए हमले की साज़िश भारत प्रशासित कश्मीर में रची गई थी." लेकिन पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ़्तार किए गए लोगों से अभी पूछताछ चल रही है. गिरफ़्तार किए गए लोगों में से एक को पुंछ ज़िले के सीमावर्ती इलाक़े मेंधर का रहने वाला बताया गया और दूसरा राजौरी ज़िले का है. पुलिस का कहना है कि इन दोनों के पास से एक कार बरामद की गई है जिसका इस्तेमाल हथियार और गोला बारूद छुपाने के लिए किया गया था. पुलिस का यह भी कहना है कि इन लोगों ने अयोध्या में विवादित स्थल के पास हमला करने वालों को वाहन और हथियार मुहैया कराने में मदद की थी. ग़ौरतलब है कि अयोध्या में विवादित स्थल के पास एक हमला हुआ था और पुलिस का कहना है कि उस हमले में शामिल सभी पाँचों लोगों को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार दिया था. |
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