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'अयोध्या में मारे गए चरमपंथी मुसलमान' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि मंगलवार को अयोध्या के विवादित परिसर में मारे गए पाँचों चरमपंथी मुस्लिम थे. मंगलवार को सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में पाँचों चरमपंथी मारे गए थे. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बुधवार की सुबह इन पाँचों चरमपंथियों को फैज़ाबाद के रकाबगंज इलाक़े में दफ़ना दिया है. पुलिस के अनुसार क़ब्रिस्तान के व्यवस्थापक ने पहले तो चरमपंथियों को दफ़नाने के लिए लिए जगह देने से मना कर दिया लेकिन प्रशासन ने बाद में उन्हें मना लिया. दफ़नाने का काम लावारिस लाशों को दफ़नाने वाली स्वयंसेवी संस्था ने किया. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम के आधार पर चरमपंथियों की पहचान मुस्लिम के रूप में की गई. पुलिस अधिकारी का कहना था कि चरमपंथियों के पास से ऐसी कोई चीज़ नहीं मिली जिसके आधार पर उनकी पहचान की जा सके. गिरफ़्तार ड्राइवर रेहान ने पुलिस को ये बताया है कि चरमपंथियों की बोली उसकी समझ में नहीं आ रही थी. पुलिस का कहना है कि डील-डौल और चेहरे-मोहरे से लग रहा था कि चरमपंथी देश के सुदूर उत्तरी इलाक़े के हो सकते हैं. विवरण चरमपंथियों की तस्वीरें और अन्य विवरण कश्मीर और दूसरे राज्यों में भेजे गए हैं. राज्य के पुलिस प्रमुख यशपाल सिंह ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने भारतीय कश्मीर के पुलिस प्रमुख से इन चरमपंथियों की पहचान के बारे में बातचीत की है. उन्होंने बताया कि भारत के किसी भी चरमपंथी गुट के पास इतनी क्षमता नहीं जितनी इन चरमपंथियों के पास थी और इस आधार पर ये भी हो सकता है कि ये चरमपंथी भारत के बाहर के हों. मंगलवार को हुई घटना में मारे गए छठा व्यक्ति की पहचान रमेश कुमार पांडे के रूप में हुई है. उनकी पहचान उनकी घड़ी और चप्पल के आधार पर हुई. उनका शव उनके परिवार को दे दिया है. रमेश कुमार पांडे अपने घर से सुबह नौ बजे निकले था और वे गाइड और पंडे का काम करते थे और पुलिस का मानना है कि वे दुर्घटनावश धमाके की चपेट आ गए. |
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