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आडवाणी ने अयोध्या का दौरा किया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने शुक्रवार को अयोध्या का दौरा किया. लेकिन विहिप नेताओं और भाजपा अध्यक्ष के बीच दूरी बनी हुई है. आडवाणी ने यूपीए सरकार को आतंकवाद के ख़िलाफ़ बने पोटा क़ानून को समाप्त करने के लिए आड़े हाथों लिया. उनका कहना था कि एनडीए सरकार ने संसद का संयुक्त सत्र बुलाकर पोटा क़ानून पारित किया था. आडवाणी के साथ राममंदिर आंदोलन के पुराने नेता कल्याण सिंह और उमा भारती भी अयोध्या गए थे. आडवाणी ने अयोध्या में चरमपंथी हमले को भयानक बताया. उनका कहना था कि रघुनाथ मंदिर और अक्षरधाम पर हुए हमले में बहुत कम लोग शामिल थे जबकि इस हमले में कई लोग शामिल थे. उनका कहना था कि जनता को तब तक संतोष नहीं होगा जब तक अयोध्या में मंदिर नहीं बनता. आडवाणी ने कहा कि एनडीए सरकार के दौरान कई वर्गों के प्रयत्नों से इसे आगे बढ़ाया गया था. भाजपा अध्यक्ष का कहना था कि यदि मिलजुलकर मंदिर की योजना बने तो कई समस्याएँ दूर हो सकती हैं जिसमें आतंकवाद भी शामिल है. इस दौरान उमा भारती ने राम मंदिर के पक्ष में नारे लगाए और कल्याण सिंह ने भी कहा कि मंदिर निर्माण होना चाहिए. दूरी बरक़रार आडवाणी के इस दौरे में बहुत की कम भीड़ जुटी थी. यहाँ तक कि विहिप नेताओं ने भी दूरी बनाए रखी. दरअसल विहिप नेताओं और भाजपा अध्यक्ष के बीच अब भी दूरी बनी हुई है. अयोध्या यात्रा के दौरान उनकी विहिप प्रमुख अशोक सिंघल से केवल शिष्टाचारवश मुलाक़ात हुई. विहिप के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई. उनका कहना था कि जब आडवाणी केशवपुरम पहुँचे तो उस समय अशोक सिंघल लखनऊ के लिए रवाना हो रहे थे. विहिप नेता आडवाणी के जिन्ना संबंधी बयान को लेकर नाराज़ हैं. उनका मानना है कि एनडीए सरकार के दौरान मंदिर निर्माण की दिशा में भी कोई कार्य नहीं हुआ. |
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