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केंद्र सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दल तेल की क़ीमतों में वृद्धि और आर्थिक नीतियों का विरोध करने के लिए आज देशव्यापी प्रदर्शन करने जा रहे हैं. वामपंथी दलों का कहना है कि सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन कर रही है इसलिए नीतियों पर बदलाव करने के लिए उस पर दबाव डालना ज़रूरी है. इसके बावजूद सरकार को किसी तरह का कोई ख़तरा नहीं है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और श्रम संगठन सीटू के महासचिव एमके पंधे ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हम सरकार को नहीं बदलना चाहते बल्कि उसकी नीतियां बदलना चाहते हैं, ग़लत नीतियों के ख़िलाफ़ हमारा विरोध जारी रहेगा." इस बीच नाराज़ वामपंथियों को मनाने की कोशिशें भी जारी हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत से सोमवार को फ़ोन पर बात की है. हालांकि कांग्रेस ने कहा है कि किसी भी मुद्दे पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन नहीं हुआ है और वामपंथी दलों ने जो मुद्दे उठाए है वे सोनिया गाँधी की वापसी के बाद सुलझा लिए जाएँगे. बहिष्कार भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड का दस प्रतिशत हिस्सा बेचने के सरकार के फ़ैसले के विरोध में रविवार को वामपंथी दलों ने घोषणा की थी कि अब वो यूपीए की समन्वय समिति की बैठकों में भाग नहीं लेंगे. इसे लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी को एक खुला पत्र लिखा था और इसकी एक प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी भेजी थी. प्रधानमंत्री ने इसी के बाद रविवार की शाम को प्रकाश कारत से फ़ोन पर बातचीत की थी. कांग्रेस नेताओं के अनुसार प्रधानमंत्री ने वामपंथियों को आश्वासन दिया है कि उनके मुद्दों पर आगे चर्चा की जाएगी. न्यूनतम साझा कार्यक्रम कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा है कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और कांग्रेस ये नहीं मानती कि इसका कोई उल्लंघन हुआ है. उन्होंने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में लिखा है कि 'नवरत्नों' का निजीकरण नहीं किया जाएगा और वे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बने रहेंगे. इसे प्रधानमंत्री ने भी बार बार दोहराया है कि उनका निजीकरण नहीं किया जाएगा. भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता अरूण जेटली ने वामपंथी दलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये सिर्फ़ दिखावे के लिए आपस में झगड़ रहे हैं. उन्होंने न्यूनतम साझा कार्यक्रम को भी दिखावा बताया. उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों का समन्वय समिति की बैठकों में न जाने का फ़ैसला सिर्फ़ दिखावा है और ये सार्वजनिक रुप से कहते कुछ और हैं और फिर सरकार का समर्थन ही करते हैं. अरुण जेटली ने कहा, "वामपंथियों की असली परीक्षा संसद में होगी कि वो सरकार को बचाने का काम करते हैं या फिर अपने विरोध पर क़ायम रहते हैं." |
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