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'ग़रीबों तक नहीं पहुँची है मदद' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया की सबसे बड़ी कल्याणकारी संस्थाओं में से एक, ऑक्सफ़ैम का कहना है कि सूनामी से पीड़ित असली ज़रूरतमंद लोगों तक सबसे कम राहत पहुँची है जबकि मज़बूत आर्थिक स्थिति वाले लोगों को ज़्यादा लाभ मिला है. 26 जून को सूनामी की तबाही के छह महीने होने जा रहे हैं, इस मौक़े पर ऑक्सफ़ैम ने एक विस्तृत सर्वेक्षण कराया है. सर्वेक्षण के मुताबिक़ ग़रीब लोग लंबे समय तक शरणार्थी शिविरों में रहने को विवश थे और उनके लिए रोज़गार दोबारा शुरू करना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है. ऑक्सफ़ैम ने ज़ोर देकर कहा है कि सूनामी पीड़ित ग़रीब लोगों तक पहले और अधिक मदद पहुँचनी चाहिए. सूनामी की चपेट में आकर इंडोनेशिया, श्रीलंका और भारत में लगभग दो लाख लोगों की मौत हो गई और लाखों लोग बुरी तरह से तबाह और बर्बाद हो गए. ऑक्सफ़ैम का कहना है कि सूनामी प्रभावित इलाक़ों में अमीरों और ग़रीबों के बीच की खाई और बढ़ गई है क्योंकि ग़रीब लोग और अधिक ग़रीब हो गए हैं. खाई सर्वेक्षण के परिणाम बताते हैं कि तमिलनाडु के दलितों की दशा बहुत ही दयनीय है जबकि श्रीलंका में व्यापारियों और ज़मींदारों को ज़्यादातर लाभ मिला है. इंडोनेशिया के आचे प्रांत में अमीरों और गरीबों के बीच की खाई सबसे गहरी है, आचे प्रांत सूनामी से सबसे बुरी तरह तबाह हुआ था, आचे में अब भी लगभग पाँच लाख लोग बेघर हैं जबकि अमीर लोग शरणार्थी शिविर छोड़कर जा चुके हैं. एक अन्य सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई है कि छह महीने बीत जाने के बाद भी ज़्यादातर जगहों पर लोगों के लिए स्थायी घर नहीं बनाए जा सके हैं. ऑक्सफैम ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि सूनामी राहत को ज़रूरतमंदों तक पहुँचाने के लिए ज़िम्मेदार लोगों ने इस नाकामी को स्वीकार तक नहीं किया है. ऑक्सफ़ैम का कहना है कि सूनामी की भयावहता को देखते हुए दुनिया भर से लोगों ने इतनी बड़ी रक़म सहायता के लिए दी थी कि ग़रीबों की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने में कोई दिक़्कत आनी ही नहीं चाहिए थी. ऑक्सफ़ैम का कहना है कि इस नाकामी से साफ़ हो गया है कि व्यवस्था में गंभीर ख़ामियाँ हैं जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए. |
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