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15 दिनों में बहुत कुछ सीखा: आडवाणी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लालकृष्ण आडवाणी के बयान से भारतीय जनता पार्टी में उपजे राजनीतिक संकट के चार दिनों के बाद शनिवार को एकबार फिर से दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय की फ़िज़ा में बदलाव आता दिखाई दिया. आडवाणी के इस्तीफ़े की वापसी पर आतिशबाजी और बधाई देने वालों का तांता भाजपा कार्यालय पर देखने को मिला. भाजपा के पदाधिकारियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए जब लालकृष्ण आडवाणी पार्टी कार्यालय पहुँचे तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया. इसपर आडवाणी ने कहा कि इस जोश और उल्लास को अभी दिखाने के बजाय इसे बिहार चुनावों के लिए बचाकर रखने की ज़रूरत है. बदलती फ़िज़ा के कुछ ऐसे ही संकेत भाजपा के पदाधिकारियों की बैठक में भी मिले. भाजपा प्रवक्ता सुषमा स्वराज के मुताबिक पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि यूँ तो व्यक्ति जीवन में हमेशा कुछ न कुछ सीखता ही रहता है लेकिन कई बार ज़िंदगी में असाधारण और अनापेक्षित अनुभव भी आते हैं. सीखे सबक आडवाणी ने कहा कि पिछले 15 दिनों में उन्हें असाधारण और अनपेक्षित अनुभव हुए जिनसे उन्होंने ज़िंदगी में बहुत कुछ सीखा है. एक अनुभव जो पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुआ और दूसरा अनुभव जो पाकिस्तान से लौटने के बाद हुआ. उन्होंने कहा कि वो उम्मीद करते हैं कि इन अनुभवों ने उन्हें जो कुछ सिखाया है, वो उनकी ज़िंदगी में आगे की ज़िम्मेदारियाँ संभालने में काम आएगा. आडवाणी ने कहा कि उनके इस्तीफ़े की वापसी पर जश्न मनाने की ज़रूरत नहीं है बल्कि कार्यकर्ताओं को इस जोश को बिहार के चुनावों में इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जश्न होगा, पर बिहार चुनावों के बाद. |
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