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गुरुवार, 09 जून, 2005 को 13:26 GMT तक के समाचार
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आरएसएस अड़ा, भाजपा में दरार
आडवाणी
वापसी का रास्ता कठिन हुआ
एक ओर तो भारतीय जनता पार्टी लालकृष्ण आडवाणी को मनाने के लिए संसदीय बोर्ड में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है जिसमें उनकी पाकिस्तान यात्रा का भी ज़िक्र हो.

लेकिन दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने साफ़ संकेत दिए हैं कि वह चाहता है कि आडवाणी जिन्ना पर दिए गए बयान पर पुनर्विचार करे.

इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर जिस दरार की चर्चा दो दिनों से चल रही थी वह आज सतह पर आ गई है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और संघ के प्रिय माने जाने वाले मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को सार्वजनिक रुप से यह बयान दे दिया है कि जिन्ना को किसी भी तरह धर्मनिरपेक्ष नहीं माना जा सकता.

इन बयानों के संकेत साफ़ हैं कि इस्तीफ़ा वापसी का रास्ता कठिन होता जा रहा है.

आरएसएस का रुख़

आरएसएस प्रवक्ता राम माधव ने मुंबई में बीबीसी को दिए अपने साक्षात्कार में कहा है कि संघ को विचारधारा से कोई समझौता मंज़ूर नहीं है.

आरएसएस शाखा
आरएसएस विचारधारा को लेकर कोई समझौता नहीं चाहता

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, "संघ चाहता है कि जिन्ना को लेकर जो बयान दिया गया है आडवाणी जी उस पर पुनर्विचार करें."

उन्होंने कहा कि आडवाणी जी ने जो कुछ कहा और उस पर भारत में जो प्रतिक्रिया हुई उसे लेकर आरएसएस चिंतित है और वे चाहते हैं कि इस पर एक स्पष्टीकरण आए.

राम माधव ने कहा कि आरएसएस मानता है कि जिन्ना को लेकर आडवाणी के बयान पर जो कुछ कहा गया है उससे एक भ्रम पैदा हुआ है. इस मामले में और अखंड भारत के मामले में संघ की अपनी एक विचारधारा है.

उन्होंने भाजपा के अध्यक्ष पद और संसदीय बोर्ड के नए प्रस्ताव को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि यह तो पार्टी का अंदरूनी मामला है और इस पर आरएसएस को कुछ नहीं कहना है.

विश्व हिंदू परिषद ने पहले ही कह दिया है कि विचारधारा महत्वपूर्ण है, व्यक्ति नहीं.

भाजपा में दरार

ये ख़बरें पिछले दो दिनों से चल रही थीं कि आडवाणी के बयान को लेकर भाजपा दो धड़ों में बँटी हुई है.

और इसके संकेत मिल भी रहे थे क्योंकि वाजपेयी के अलावा पार्टी का कोई वरिष्ठ आडवाणी का बयान का समर्थन करने के लिए सामने नहीं आया था. जसवंत सिंह ने देर से, यानी बुधवार की शाम एक बयान ज़रुर दिया कि वे आडवाणी के बयान से सहमत हैं.

मुरली मनोहर जोशी
जोशी संघ के प्रिय नेताओं में से एक माने जाते हैं

अपवाद के रुप में साहिब सिंह वर्मा जैसे इक्का दुक्का नेता ही ऐसे थे जो ख़ुलकर आडवाणी के साथ खड़े हुए.

लेकिन वेंकैया नायडू से लेकर प्रमोद महाजन तक दूसरी पंक्ति के नेताओं में से किसी ने भी सार्वजनिक रुप से आडवाणी के समर्थन में कोई बयान नहीं दिया है.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा के भीतर सामान्य रुप से यह असमंजस है कि यदि वे जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं तो वे पार्टी की अब तक की नीति को किस तरह सही ठहराएँगे.

भाजपा की दरार के सतह में आ जाने के बाद जानकार मानते हैं कि अब संसदीय बोर्ड में संशोधित प्रस्ताव लाकर सर्वसम्मति से पारित करवाना इतना आसान नहीं रह गया है जितना पहला प्रस्ताव पारित करवाना था.

और जैसी कि ख़बरें हैं संशोधित प्रस्ताव ही आडवाणी के लौटने की शर्त है.

एनडीए के सहयोगी

एक ओर भाजपा के भीतर घमासान जारी है और दूसरी ओर एनडीए के कुछ दल आडवाणी के समर्थन में सामने आ गए हैं.

जनता दल यूनाइटेड ने नेता नीतिश कुमार ने पहले ही कहा था कि आडवाणी के बयान से वे सहमत हैं. लेकिन पार्टी की ओर से बुधवार को बयान जारी किया गया है कि यदि आडवाणी को हटाकर किसी कट्टर हिंदूवादी नेता को भाजपा अध्यक्ष बनाया जाता है तो वे एनडीए में बने रहने पर विचार करेंगे.

इसे लेकर जद(यू) एक बैठक भी कर रहा है. हालांकि इसे बिहार की राजनीति और आने वाले चुनावों से जोड़कर ज़्यादा देखा जा रहा है.

दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश से तेलगू देशम पार्टी के नेता चंद्राबाबू नायडू ने आडवाणी के समर्थन में बयान जारी किया है.

एनडीए के पुराने सहयोगी और इस समय केंद्र में मंत्री रामविलास पासवान ने भी आश्चर्यजनक रुप से आडवाणी के बयान का समर्थन किया है.

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