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संघ-विहिप का कड़ा रुख़ जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आपातकाल के बाद जनसंघ ख़त्म हुआ तो समझा जा रहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया है. इनके कुछ ख़ासे महत्वपूर्ण संस्थापकों में से एक लालकृष्ण आडवाणी भी थे. तब से लेकर अभी कुछ समय पहले तक किसी ने नहीं सोचा था कि संघ उनके किसी भी बयान पर इस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा. मंगलवार को जब लालकृष्ण आडवाणी ने भाजपा के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया तो संघ के प्रवक्ता ने इस संभावना से साफ़ इंकार किया कि वो आडवाणी से अपना इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए कहेंगे. राम माधव कहते हैं, “हमने इस्तीफ़े की माँग तो की नहीं थी और केवल कुछ मुद्दों पर अपनी आपत्ति जताई है. बाकी तो यह पार्टी का अंदर का मामला है. हम मानते हैं कि यह हमारे मत के अनुरूप नहीं है पर इसीलिए हमने इसपर पुनर्विचार करने की माँग की है.” उमा भारती प्रकरण के बाद पार्टी में दूसरी पंक्ति के नेताओं को लेकर पहले से ही उठे मतभेद को देखते हुए, ऐसा भी नहीं है कि संघ में बहुत ख़ुशी है लेकिन उनकी दिनभर आडवाणी से कोई बातचीत नहीं हुई और अब वो आडवाणी द्वारा छेड़े गए मुद्दों पर बहस के लिए भी तैयार नहीं हैं. राम माधव कहते हैं, “वो बहस अब हमारे सामने नहीं है. मैंने कह दिया है कि वो बहस अब ख़त्म हो चुकी है.” पर जब उनसे पूछा कि अटल जी तो इस बहस को आगे ले जाना चाहते हैं तो राम माधव बोले, “जहाँ तक संघ की बात है, हमारे लिए तो यह बहस ख़त्म हो चुकी है.” विहिप ग़रम उधर विश्व हिंदू परिषद के अपाध्यक्ष आचार्य गिरिराज किशोर ने आडवाणी के इस्तीफ़े का यह कहते हुए स्वागत किया है कि ऐसा जनता की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है. हालांकि इस मामले में संघ के तेवर तो कठोर नज़र नहीं आए पर विहिप के तेवर काफ़ी कड़े थे. वो कहते हैं, “ये तो वो ही बात हुई कि नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली.” आडवाणी द्वारा दिए गए बयानों पर टिप्पणी के अलावा उन्होंने आडवाणी के व्यक्तित्व और पिछले कुछ वर्षों में उनके द्वारा की जा रही राजनीति पर भी बयान दिए. वो कहते हैं, “आप लोग ख़ुद ही सोचिए कि क्या भाजपा धर्मनिरपेक्षता की विचारधारा के चलते सत्ता में आई. मुझे लगता है कि जो लोग गंगा जाने पर गंगादास और यमुना जाने पर यमुनादास हो, ऐसे लोगों का कुछ ठीक नहीं है. मनुष्य हवा को बनाता है, हवा आदमी को नहीं बनाती.” दिनभर भाजपा से ऐसे प्रयासों की ख़बर आती रही कि लालकृष्ण आडवाणी को मनाने की कोशिशें चलती रहीं. पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि फिलहाल पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू को अभी कार्यभार संभालने के लिए कहा गया है. विपक्ष जहाँ इस मामले में तमाशबीन बना हुआ है, वहीं आडवाणी के बारे में अभी भी हिंदूत्ववादी संगठन कड़ी टिप्पणी कर रहे हैं. भाजपा का जन्म एक विचारधारा प्रधान दल के रूप में हुआ था औऱ 90 के दशक में सत्ता में आ जाने के बाद एनडीए के अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर कहते थे कि गठबंधन चलाना उन्हें आता है. लेकिन आज सवाल यह उठ रहा है कि गठबंधन संभालने की प्रक्रिया में कहीं पार्टी को ही भँवर में तो नहीं ढकेल दिया. |
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