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कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदुत्व के पर्याय, बीजेपी के लौह पुरूष और एक सप्ताह पहले तक पाकिस्तान में नापसंद व्यक्तियों की सूची में अव्वल स्थान रखने वाले आडवाणी जी स्वदेश लौट आए हैं. अपने पाकिस्तान दौरे के बाद सीमा के उस पार वह हरदिलअज़ीज़ चाहे नहीं बन पाए हों, पर उन्होंने दिल जीते जरूर हैं. कुछ लोगों को वहाँ चौकाया हैं, कुछ शायद अब तक उनके हृदय परिवर्तन से अचरज में हों और कुछ पाकिस्तान में प्रकट उनके उदगारों को महज़ एक पब्लिसिटी स्टंट समझ रहे हों. लेकिन इसमें शायद ही किसी को शक हो सकता है कि पाकिस्तान यात्रा से पूर्व गृहमंत्री आडवाणी की जो छवि वहाँ थी उसमें सुधार ही हुआ है. बहस का विषय सिर्फ़ यह हो सकता है कि उनकी छवि कितनी और कितने समय के लिए सुधरी है. इसमें भी कोई शक नहीं है कि इस यात्रा से न सिर्फ़ आडवाणी जी कि व्यक्तिगत छवि सुधरी है बल्कि भारत-पाकिस्तान शांतिवार्ता को भी इससे बल मिलेगा. स्थिति में बदलाव अब लौटे भारत. तो यहाँ बीजेपी अध्यक्ष की स्थिति पहले से ठीक उलट है. संघ परिवार आग-बबूला है. उनके लिए इस समय आडवाणी जी और जिन्ना में कोई ख़ास फर्क नहीं रह गया है. अपने गली-मोहल्ले तक में जनाधार नहीं रखने वाले लेकिन उच्चपदों पर आसीन विहिप नेता, कुछ वर्ष पूर्व तक के अपने हृदय सम्राट पर ऐसे बरस रहे हैं जैसे हिंदू धर्म के संदर्भ में आडवाणी से बड़ा जयचंद कोई अबतक हुआ ही नहीं. कोई उनसे पाकिस्तान वापस जाने को कह रहा है तो कोई माफ़ी माँगने को. कुछ लोगों ने उनसे इस्तीफ़े की माँग भी कर दी है. कट्टरवादी हिन्दुत्व लॉबी तो नाराज़ है ही. बीजेपी के अंदर भी स्वयं आडवाणी जी की चुनी हुई टीम के लोग भी हतप्रभ हैं. एक तरफ गुरू और नेता हैं तो दूसरी ओर पार्टी कार्यकर्ताओं और संघ परिवार के घटक दलों का आक्रोश. पूरी स्थिति ऐसी है कि न निगलते बनता है न उगलते. हिंदुत्व विचारधारा के हामी लोगों की नाराज़गी तो समझ में आती है लेकिन त्रासदी यह है कि भारतीय मुसलमान भी गुस्से में हैं. उनके नाराज़गी के कारण भी हैं. भारत में रहने वाले मुसलमान तो आज तक कायदे-आज़म जिन्ना की धर्म पर आधारित दो राष्ट्रों की सफल वकालत का ख़ामियाजा भुगत रहे हैं. उनके पुरखों ने जिन्ना के आह्वान पर पाकिस्तान न जाकर भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर विश्वास जताया था. सावरकर और जिन्ना पाकिस्तान के गठन और उसके मुस्लिम स्वरूप के कारण भारतीय मुसलमानों को आए दिन अपने हिंदू पड़ोसियों की जो तोहमत झेलनी पड़ती है, उसे बग़ैर मुसलमान हुए समझना मुश्किल है. फिर भला वे जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष किस आधार पर मान लें. भारत में सबसे बड़े मुस्लिम संगठन, जमात-उल-हिंद के महासचिव महमूद मदनी तो इतने व्यथित थे कि उन्होंने मुझे शिलोंग से फोन करके बताया कि आम भारतीय मुसलमान कि नज़र में वीर सावरकर और जिन्ना दोनों ही बराबर सांप्रदायिक हैं. एक बात और है जो भारत में रहने वाले मुसलमानों को रास नहीं आ रही. वह है आडवाणी जी का पाकिस्तान जाकर अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने का प्रयास. क्या भारत में रहने वाले मुसलमान पाकिस्तान को अपने रोल मॉडल की तरह देखतें हैं और क्या पाकिस्तान से मिला धर्मनिरपेक्षता का ठप्पा, बीजेपी और स्वयं आडवाणी जी को भारतीय मुस्लिम वर्ग में भी लोकप्रियता दिलवाएगा. महमूद मदनी के अनुसार इनका उत्तर है, बिल्कुल नहीं. बकौल मुस्लिम नेताओं के यह भी संघ परिवार का पुराना कुप्रचार है कि भारतीय मुसलमान अपने को पाकिस्तानियों के साथ ज़्यादा जुड़ा हुआ महसूस करता है. ज़्यादा सचेत मुसलमान नेताओं के अनुसार जो लोग और नेता ऐसा सोचते हैं वह न सिर्फ़ भारतीय मुसलमानों का अपमान करते हैं बल्कि जाने-अंजाने कट्टरवादिता को हवा भी देते हैं. बाबरी ध्वंस दुखद व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि आडवाणी जी लोगों के मन से अपनी कट्टरवादी छवि धोना चाहते हैं. अयोध्या में मस्जिद गिराए जाने का दिन उनके जीवन का सबसे दुखद दिन था, यह बात उन्होंने सबसे पहले पाकिस्तान में नहीं बल्कि बीबीसी के लिए पिछले वर्ष चुनावी मुहीम के मध्य मुझे दिए एक साक्षात्कार में कही थी. यह भी किसी हद तक सही है कि राजनीतिज्ञों में न कोई ख़ास उदारवादी है, न कोई कट्टरपंथी. किसी कि राजनीति कट्टरपंथी है तो किसी कि उदारवादी. शायद आडवाणी जी का कट्टरपंथ भी कुछ वैसा ही मुखौटा है जैसा कि वाजपेयी जी का उदारवादी स्वरूप. पूरे प्रकरण का निचोड़ देखें तो निष्कर्ष यह निकलता है कि सार्वजनिक जीवन में शेर की सवारी नहीं करनी चाहिए. शेर से उतरने का प्रयास भी उतना ही जानलेवा हो सकता है, जितनी कि चढ़ने कि कोशिश. अगर आडवाणी जी राम रथ पर चढते ही नहीं तो शायद आज यह सवाल नहीं उठते. फिर भी अगर सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे मौका अवश्य मिलना चाहिए. आने वाले दिन बीजेपी और आडवाणी जी के लिए निर्णायक हो सकते हैं. |
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