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आडवाणी सात दिनों के पाकिस्तान दौरे पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीजेपी अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी पाकिस्तान के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर सात दिन के दौरे पर पाकिस्तान पहुँच गए हैं. आडवणी पहले लाहौर पहुँचे जहाँ से वे इस्लामाबाद जा रहे हैं. 1929 में पाकिस्तान में जन्मे और पले-बढ़े आडवाणी विभाजन के बाद भारत आ गए थे. वे राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के न्यौते पर वहाँ पहुँचे हैं. वैसे आडवाणी की ये दूसरी पाकिस्तान यात्रा है. इससे पहले वे 1979 में देश के सूचना मंत्री के रूप में पाकिस्तान का दौरा कर चुके हैं. पहले दो दिन आडवाणी इस्लामाबाद में रहेंगे जहाँ प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ के अलावा अन्य पाकिस्तानी नेताओं से भी उनकी मुलाक़ात होगी. इस्लामाबाद के अलावा आडवाणी लाहौर और कराची भी जाएँगे. पहले आडवाणी का अपने गृह नगर हैदराबाद जाने का भी कार्यक्रम था लेकिन अब उनका कार्यक्रम थोड़ा बदल गया है. लेकिन आडवाणी झेलम शहर में हज़ारों साल पुराने कटास के मंदिर जाएँगे जिसका हाल ही में जीर्णोद्धार हुआ है. आडवाणी वहाँ मुस्लिम लीग के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन के निमंत्रण पर जा रहे हैं. आडवाणी पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से भी मिलेंगे. पाकिस्तान रवाना होने से एक दिन पहले एक बयान में आडवाणी ने उम्मीद जताई कि भारत और पाकिस्तान पुरानी बातों को भूल जाएँगे. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नए रिश्तों की उम्मीद जगी है. आडवाणी ने इस बात पर ख़ुशी जताई कि मनमोहन सिंह की सरकार भी बातचीत के माध्यम से शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की नीति पर चल रही है. |
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