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सर क्रीक वार्ता बिना नतीजे के समाप्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच सर क्रीक विवाद पर इस्लामाबाद में हुई दो दिनों की बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है. बातचीत के बाद एक संक्षिप्त साझा घोषणापत्र जारी किया जिसमें दोनों पक्षों ने बातचीत आगे जारी रखने पर सहमति जताई है. घोषणापत्र में कहा गया,"बातचीत काफ़ी खुले और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई. दोनों पक्षों ने विभिन्न संबंधित मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया." बातचीत में भारतीय दल की अगुआई सर्वेयर जनरल ऑफ़ इंडिया मेजर जनरल गोपाल राव ने की. वहीं पाकिस्तानी दल का नेतृत्व रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रियर एडमिरल एहसानुल हक़ ने की. सर क्रीक मामले पर विवाद 1960 के दशक में शुरू हुआ था. 1969 से लेकर अभी तक की बातचीत से पहले सात चक्रों की बातचीत हो चुकी है. भारत और पाकिस्तान ने समेकित बातचीत के लिए जिन आठ विषयों की पहचान की है उनमें से सर क्रीक विवाद भी एक है. विवाद सर क्रीक विवाद दरअसल 60 किलोमीटर लंबी दलदली ज़मीन का विवाद है जो भारतीय राज्य गुजरात और पाकिस्तान के राज्य सिंध के बीच स्थित है. सर क्रीक पानी के कटाव के कारण बना है और यहाँ ज्वार भाटे के कारण यह तय नहीं होता कि कितने हिस्से में पानी रहेगा और कितने में नहीं. दूसरे शब्दों में सर क्रीक दोनों देशों के बीच अस्थिर सी सीमा है. इस कारण दोनों देशों के मछुआरों के लिए अच्छी-ख़ासी मुसीबत बनी हुई है जो असावधानी से सीमा उल्लंघन कर बैठते हैं. इस इलाक़े का सामरिक महत्व भी है और आर्थिक भी पर. हालाँकि सर क्रीक के पास कोई बड़ी आबादी नहीं है. |
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