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आडवाणी छवि बदलना चाहते हैं: कांग्रेस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के इस्तीफ़े को पार्टी का अंदरूनी मामला बताया है और कहा है कि जो कुछ आडवाणी ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान कहा है उससे लगता है कि वे अपनी छवि बदलना चाहते हैं. पार्टी की महासचिव अंबिका सोनी ने कहा है कि यह तो आख़िरकार पार्टी को सोचना है कि वे इस्तीफ़े के बारे में क्या फ़ैसला करते हैं और अपने अंदरूनी खींचतान से किस तरह निपटते हैं. उन्होंने कहा, "आडवाणी जी ने जिन्ना के बारे में जो कुछ कहा है उससे लगता है कि वो बहुत सोच-समझकर इस नतीज़े पर पहुँचे होंगे कि उन्हें छवि बदलने की ज़रुरत है." अंबिका सोनी ने कहा कि अब तक आडवाणी हिंदुत्व की बात करते रहे हैं और रथयात्राएँ करते रहे हैं लेकिन अब उन्हें महसूस हो रहा होगा कि इससे वोट नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा, "उन्होंने अपनी सोच तो बदल ली लेकिन वे अपने सहयोगी दलों को नहीं समझा पाए." कांग्रेस महासचिव ने कहा, "जिस मुखौटे के बारे में कहा जाता रहा है कि वाजपेयी जी ने पहना हुआ है उसे अब आडवाणी पहनने की कोशिश कर रहे हैं." पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जो कांग्रेस को स्यूडो सेक्युलर (छद्म धर्मनिरपेक्ष) कहते आए हैं उन्हें अब जिन्ना सच्चे सेक्युलर नज़र आ रहे हैं. लोग हैरान हैं कि जो लोग आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे वे तो छद्म धर्मनिरपेक्ष हो गए लेकिन जिन्ना धर्मनिरपेक्ष हो गए. 'जॉर्ज इतिहास पढ़ें' जॉर्ज फर्नांडिस के इस बयान पर कि विभाजन के लिए जिन्ना नहीं, नेहरू ज़िम्मेदार थे, अंबिका सोनी ने कहा कि उन्हें इतिहास दोबारा पढ़ना चाहिए इससे उनको भी फ़ायदा होगा और देश को भी. उन्होंने कहा कि इतिहास के जो नए सबक सिखाए जा रहे हैं उस पर सावधानी से ग़ौर करने की ज़रुरत है. उनका कहना था कि जिन लोगों ने कभी अंग्रेज़ों की लाठी खाई नहीं, जिन्होंने इतिहास बनाने में सहयोग नहीं दिया हो और ख़ून नहीं बहाया हो वो इतिहास क्या बताएँगे. वो लोग अब गांधी और ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान जैसे लोगों को भी भूल गए होंगे. |
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