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मंगलवार, 07 जून, 2005 को 07:06 GMT तक के समाचार
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आडवाणी फ़ैसला बदलने को तैयार नहीं
लालकृष्ण आडवाणी
आडवाणी ने पहले भी कहा था कि जिन्ना पर दिए गए अपने बयान पर वे क़ायम हैं
भाजपा नेताओं के आग्रह के बावजूद लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी अध्यक्ष पद से दिया गया अपना इस्तीफ़ा वापस लेने से मना कर दिया है.

आडवाणी के त्यागपत्र के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी समेत पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के बीच कई बार बैठक हुई और फिर आडवाणी से निर्णय बदलने का आग्रह किया गया.

लेकिन बाद में बीजेपी उपाध्यक्ष एम वेंकैया नायडू ने पत्रकारों से कहा,"दुर्भाग्य से उन्होंने मना कर दिया. वे अपने फ़ैसले पर कायम हैं".

मंगलवार सुबह अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान बाबरी मस्जिद और मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर दिए बयान से शुरु हुए विवाद के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

इस बयान को लेकर भाजपा के सहयोगी हिंदू संगठन ख़ासे नाराज़ थे और उनसे बयान वापस लेने की मांग कर रहे थे.

बैठकों का सिलसिला

हालांकि आडवाणी के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी एक असमंजस का माहौल था लेकिन इस्तीफ़े ने पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है.

उनके इस्तीफ़े के बाद पार्टी के कई नेता जिसमें वेंकैया नायडू, बाल आप्टे और मुख़्तार अब्बास नक़वी, महासचिव राजनाथ सिंह, प्रमोद महाजन, प्रकाश जावड़ेकर और सुषमा स्वराज सभी लालकृष्ण आडवाणी के घर पर पहुँच गए.

इसके बाद ये नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निवास पर चले गए और उनसे लंबी चर्चा की.

इसके बाद शाम को आडवाणी अकेले अटल बिहारी वाजपेयी के घर पहुँचे और उनसे आधे घंटे चर्चा की.

वाजपेयी ने आडवाणी के बयान पर कहा था कि हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार होना चाहिए.

आडवाणी ने वाजपेयी से मिलने के बाद पत्रकारों से कोई चर्चा नहीं की.

इस्तीफ़ा

जिन्ना की कब्र पर आडवाणी
आडवाणी का कहना है कि उन्होंने पद छोड़ने का मन कराची में ही बना लिया था

मंगलवार को आडवाणी ने पार्टी महासचिव संजय जोशी को अपने निवास पर बुलाकर अपना इस्तीफ़ा उन्हें सौंपा.

अपने इस्तीफ़े में आडवाणी ने लिखा है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा या किया है जिसे वापस लेने की ज़रुरत हो.

इस पत्र में आडवाणी ने लिखा है कि ये पत्र उन्होंने कराची से भारत के लिए रवाना होने के पूर्व लिखा था. इसका मतलब यह है कि पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला उन्होंने भारत पहुँचने से पहले ही ले लिया था.

उन्होंने लिखा है कि सावधानीपूर्वक पूरे मसले पर विचार करने के बाद वे इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए.

उन्होंने कहा है कि उनके पाकिस्तान दौरे से एनडीए सरकार की ओर से किए गए प्रयास आगे बढ़े हैं.

उन्होंने अंत में लिखा है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया या कहा है जिससे हटने या पुनर्विचार करने की ज़रुरत हो.

विवादास्पद बयान

उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष आडवाणी ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान एक बार फिर बाबरी मस्जिद (जिसे भाजपा विवादित ढाँचा कहती है) के ढहाए जाने को लेकर खेद जताया था.

और दूसरा उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें धर्मनिरपेक्ष बताया था और इसी बयान पर हिंदू संगठन के नेता ज़्यादा नाराज़ थे.

जिन्ना को लेकर दिए गए उनके बयान को लेकर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की त्यौंरिया चढ़ गईं थीं और उन्होंने नाराज़गी में मांग की थी कि आडवाणी को अपना बयान वापस लेना चाहिए.

कुछेक नेताओं ने तो उनसे इस्तीफ़े की मांग भी की थी.

लेकिन आडवाणी ने पाकिस्तान यात्रा से लौटने के बाद सोमवार को कहा था कि उन्होंने जिन्ना को लेकर जो कुछ कहा है वे उस पर क़ायम हैं.

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