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आडवाणी के जवाब पर टिकी निगाहें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संसदीय बोर्ड का प्रस्ताव लेकर लालकृष्ण आडवाणी को मनाने पहुँचे भाजपा नेताओं से उन्होंने कहा है कि वे इस पर विचार करेंगे और गुरुवार को अपनी प्रतिक्रिया देंगे. भाजपा नेता संसदीय बोर्ड का वह प्रस्ताव लेकर लालकृष्ण आडवाणी के घर गए थे जिसमें उनसे इस्तीफ़ा वापस लेने का अनुरोध किया गया था. इससे पहले संसदीय बोर्ड ने आडवाणी का इस्तीफ़ा नामंज़ूर कर दिया था. पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक गुरुवार की सुबह एक बार और होनी है और संभावना है कि इसी बैठक में आकर लालकृष्ण आडवाणी अपनी बात रखेंगे. इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए लालकृष्ण आडवाणी को मनाने की कोशिश के तहत भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद आडवाणी का इस्तीफ़ा नामंज़ूर कर दिया था और एक प्रस्ताव पारित करके उनसे इस्तीफ़ा वापस लेने का अनुरोध किया था. इस प्रस्ताव को लेकर पार्टी के नेता आडवाणी के घर गए थे. यह संसदीय बोर्ड की विस्तृत बैठक थी जिसमें पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारी और भाजपा शासित राज्यों मुख्यमंत्री भी मौजूद थे. संसदीय बोर्ड की बैठक में आडवाणी नहीं आए थे और इसके बारे में वेंकैया नायडू ने कहा था कि चूंकि बैठक में उनके इस्तीफ़े पर ही चर्चा हो रही है इसलिए वे बैठक में नहीं आ रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेयी और मुरली मनोहर जोशी के अलावा शेष सभी नेता आडवाणी के घर गए थे. इन दोनों वरिष्ठ नेताओं का कहना था कि वे पहले ही आडवाणी से मिल चुके हैं. हालांकि आडवाणी इस्तीफ़ा देने के बाद एक से अधिक बार कह चुके हैं कि वे अपना इस्तीफ़ा वापस लेने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने बुधवार की सुबह प्रधानमंत्री से मिलने के बाद भी दोहराया था कि वे अपने इस्तीफ़े पर क़ायम हैं. आडवाणी ने पाकिस्तान यात्रा के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कहा था जिसके बाद विवाद काफ़ी तेज़ हो गया था और उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया. प्रस्ताव संसदीय बोर्ड ने बुधवार की शाम जो प्रस्ताव पारित किया है उसमें कहा गया है कि बोर्ड उनका इस्तीफ़ा नामंज़ूर करती है. इस प्रस्ताव में आडवाणी से अपील की गई है कि वे पार्टी का उसी तरह नेतृत्व करते रहें जैसा वे पहले करते रहे हैं. इसके अनुसार आडवाणी जी सार्वजनिक जीवन में आदर्श मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने पिछले कुछ दशकों में राष्ट्रीयता के मुद्दे पर एक तार्किक और विवेकपूर्ण बहस चलाई है. पार्टी ने आदर्शों को लेकर आडवाणी के योगदान को भी रेखांकित किया है और कहा है कि आडवाणी से पार्टी बहुत लाभान्वित हुई है और आगे भी होते रहना चाहती है. इस प्रस्ताव में जिन्ना के बारे में कोई ज़िक्र नहीं किया गया है. हालांकि प्रस्ताव में कुछ विहिप नेताओं के बयान पर आपत्ति जताई गई है और कहा है कि इससे सार्वजनिक स्तर पर चर्चा का स्तर गिरा है और इससे संघ परिवार के राष्ट्रीयता का आंदोलन कमज़ोर हुआ है. बयानबाज़ी जारी इस बीच विहिप नेताओं के बयानों को लेकर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के बीच विवाद शुरु हो गया है.
दोपहर को भारतीय टेलीविज़न चैनलों ने ख़बर दी कि आरएसएस ने विहिप महासचिव प्रवीण तोगड़िया को इस्तीफ़ा देने को कहा है. दरअसल, तोगड़िया के बयान की भाषा लेकर बवाल मचा हुआ है जिसमें उन्होंने कहा था कि "जिन्ना गद्दार थे और उनको सर्टिफ़िकेट देने वाले भी गद्दार हैं." इन ख़बरों के थोड़ी देर बाद विहिप उपाध्यक्ष गिरिराज किशोर ने कहा कि एक तो प्रवीण तोगड़िया ने आडवाणी जी का कोई नाम नहीं लिया है और यदि उन्होंने ऐसा कुछ कहा है जो आपत्तिजनक है तो वे माफ़ी मांगते हैं. लेकिन उन्होंने प्रकारांतर से संकेत दिए हैं कि तोगड़िया को हटाया नहीं जा रहा है. दूसरी ओर, जब बीबीसी ने तोगड़िया से संपर्क किया तो उन्होंने इस ख़बर को अफ़वाह बताया कि आरएसएस ने उनसे इस्तीफ़ा माँगा है. |
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