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आडवाणी ने अपना इस्तीफ़ा वापस लिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लालकृष्ण आडवाणी ने चार दिनों के नाटकीय घटनाक्रम के बाद अपना इस्तीफ़ा वापस ले लिया है और अध्यक्ष बने रहने के लिए राज़ी हो गए हैं. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है जिसमें उनकी पाकिस्तान यात्रा को सफल बतया गया था लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना को सांप्रदायिक कहा गया था. पार्टी महासचिव सुषमा स्वराज और बाद में पार्टी उपाध्यक्ष वेंकैया नायडू ने इसकी घोषणा की. इससे पहले भाजपा संसदीय बोर्ड ने एक दूसरा प्रस्ताव पारित किया है जिसमें आडवाणी की पाकिस्तान यात्रा का स्वागत किया गया है और मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में बयान को लेकर जो विवाद था उसका भी समाधान कर लिया गया है. अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान मोहम्मद अली ज़िन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताए जाने के बाद खड़े हुए विवाद के चलते आडवाणी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. प्रस्ताव सुषमा स्वराज ने प्रस्ताव के बारे में कहा गया है जहाँ तक उनकी पाकिस्तान यात्रा का संबंध है तो कटास राज मंदिर के पुनरोद्धार का जो काम आडवाणी के जाने शुरु हुआ है पार्टी उसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानती है. उन्होंने कहा कि इसके ही साथ उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के एनडीए सरकार के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी. सुषमा स्वराज के अनुसार प्रस्ताव में कहा गया है, "आडवाणी ने सीमापार आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ से जो आश्वासन लिया कि वे धीरे-धीरे इसके ढाँचे को ख़त्म करेंगे, इसे भी पार्टी इसे भी एक उपलब्धि मानती है." उन्होंने कहा कि जो एक विवाद जिन्ना के संबंध में पैदा हो गया था उसके बारे में भी पार्टी ने प्रस्ताव में अपना मत स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा, "जिन्ना के बारे में कभी भी कुछ भी कहा गया हो पार्टी मानती है है कि जिन्ना दो राष्ट्रवाद के सिद्धांत के प्रतिपादक थे और उन्हीं के कारण देश का बँटवारा हुआ और उन्होंने धर्म के आधार पर राष्ट्र बनाने के एक सांप्रदायिक आंदोलन का नेतृत्व भी किया था. उसी के कारण लाखों लोग बेघर हुए थे और एक बड़ा रक्तपात हुआ था." सुषमा स्वराज ने बताया, "इसके बाद आडवाणी जी ने कहा कि चूँकि उनकी पाकिस्तान यात्रा के बारे में सारा कुछ पार्टी ने कह दिया और जो भ्रम मेरे बयान से पैदा हुआ था समर्थकों के भीतर उसका भी समाधान कर दिया गया है इसलिए मैं इस्तीफ़ा वापस लेता हूँ." जैसा कि सुषमा स्वराज ने बताया कि इसके बाद बैठक में मौजूद नेताओं ने इसका स्वागत किया और संतोष व्यक्त किया कि आडवाणी पार्टी का नेतृत्व करते रहेंगे. कभी ना-कभी हाँ इससे पहले बार-बार मनाए जाने के बाद भी उन्होंने इस्तीफ़ा वापस लेने से इंकार कर दिया था.
बाद में भाजपा संसदीय बोर्ड की बुधवार को हुई बैठक में एक प्रस्ताव पारित करके उनका इस्तीफ़ा नामंज़ूर कर दिया गया था. और इस प्रस्ताव के साथ जब पार्टी के नेता आडवाणी के घर पहुँचे तो उन्होंने कहा कि वे इस पर विचार करेंगे. लेकिन ख़बर मिली थी कि आडवाणी को इस प्रस्ताव पर इस बात को लेकर आपत्ति थी कि इसमें उनके पाकिस्तान दौरे का कोई ज़िक्र नहीं किया गया. फिर भी इसके बाद पार्टी की ओर से एक तरह से माना जाने लगा था कि आडवाणी मान जाएँगें. लेकिन इसके बाद आरएसएस का बयान आ गया कि विचारधारा से कोई समझौता नहीं हो सकता और आडवाणी को अपने बयान पर पुनर्विचार करना चाहिए. दूसरी ओर पार्टी का एक धड़ा उनके ख़िलाफ़ खुलकर सामने आ गया. इसके बाद एक बार फिर आडवाणी की वापसी पर आशंका के बादल मंडराने लगे. लेकिन पार्टी के भीतर इस और संघ के विरोधी तेवरों के बीच भाजपा संसदीय बोर्ड ने एक दूसरा प्रस्ताव पेश किया और इसके पारित होने के बाद आडवाणी ने अपना इस्तीफ़ा वापस ले लिया. आडवाणी के बयान का विरोध कर रहे मुरली मनोहर जोशी ने कहा, "मैं इस बात से ख़ुश हूँ कि जिन्ना को लेकर पार्टी ने अपना रुख़ नहीं बदला है." हालांकि इस पर संघ की औपचारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाक़ी है, विहिप ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह भाजपा के स्पष्टीकरण से भी ख़ुश नहीं हैं. बैठक आडवाणी ने बुधवार को संसदीय बोर्ड की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था और तब पार्टी उपाध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा था कि चूंकि ख़ुद उनके ही इस्तीफ़े पर चर्चा होनी थी इसलिए आडवाणी बैठक में नहीं आए. इसके बाद तय था कि अगली बैठक गुरुवार को होगी लेकिन कोई फ़ार्मूला नहीं निकल सका और बैठक शुक्रवार तक टाल दी गई. हालांकि इसका कारण बताया गया था कि वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता जसवंत सिंह के इसराइल से लौटने तक संसदीय बोर्ड की बैठक स्थगित की गई है. शुक्रवार की बैठक में भी आडवाणी के इस्तीफ़े पर ही चर्चा होनी थी लेकिन इस बार आडवाणी बैठक में उपस्थित थे. उनके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी, मुरली मनोहर जोशी और जसवंत सिंह सहित संसदीय बोर्ड के सदस्य और पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारी बैठक में मौजूद थे. |
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