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पूर्वोत्तर राज्यों में बीएसएफ़ सतर्क | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में बांग्लादेश की सीमा से लगे पूर्वोत्तर राज्यों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) को सतर्क कर दिया गया है. इस समय बांग्लादेश में पूर्वोत्तर भारत के विद्रोही संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई चल रही है और आशंका व्यक्त की जा रही है कि कार्रवाई के कारण विद्रोही भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करें. बीएसएफ़ अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश राइफ़ल्स के अधिकारियों ने उन्हें औपचारिक रूप से इसकी जानकारी दी है कि वहाँ पूर्वोत्तर भारत के विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है. हालाँकि बांग्लादेश काफ़ी पहले से इससे इनकार करता रहा है कि उसकी ज़मीन का इस्तेमाल पूर्वोत्तर भारत के विद्रोही संगठन कर रहे हैं. लेकिन पिछले दिनों बांग्लादेश ने स्पष्ट किया था कि उसकी सेना ने सिलहट क्षेत्र में विद्रोही संगठनों के कुछ ठिकानों पर हमला किया था. पूर्वोत्तर भारत में बीएसएफ़ के पुलिस महानिरीक्षक एससी श्रीवास्तव ने असम की राजधानी गुवाहाटी में पत्रकारों को बताया कि बांग्लादेश राइफ़ल्स ने उन्हें जानकारी दी है कि पूर्वोत्तर बांग्लादेश के मौलवी बाज़ार इलाक़े में कार्रवाई के दौरान अभी तक 10 विद्रोहियों को गिरफ़्तार किया गया है और छह मारे गए हैं. गिरफ़्तारी उन्होंने बताया कि मारे गए या पकड़े गए विद्रोहियों में ज़्यादातर त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर के विद्रोही संगठनों के हैं. इनमें से एक नेशनल लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ त्रिपुरा (एनएलएफ़टी) के स्क्वैड कमांडर राजकांत देबबर्मा भी शामिल हैं. देबबर्मा 1998 में कथित रूप से त्रिपुरा के स्वास्थ्य मंत्री बिमल सिन्हा की हत्या में शामिल थे. बीएसएफ़ पुलिस महानिरीक्षक एससी श्रीवास्ताव ने बताया कि बांग्लादेश राइफ़ल्स की ओर से मिली सूचना के बाद बीएसएफ़ ने तीन राज्यों में अपने जवानों को सतर्क कर दिया है. उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की ओर से दबाव पड़ने पर विद्रोही भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करेंगे और इसलिए सीमा पर ज़्यादा चौकसी की आवश्यकता है. जानकारों का कहना है कि इस साल के आख़िर में बांग्लादेश में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की बैठक होनी है और बांग्लादेश इससे पहले भारत की सुरक्षा चिंताओं पर कार्रवाई करने का भरोसा दिलाना चाहता है. इस साल के शुरू में बांग्लादेश में सुरक्षा चिंता और नेपाल की स्थिति का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने से मना कर दिया था. इस कारण सार्क सम्मेलन को स्थगित करना पड़ा. |
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