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क्लिंटन तीन दिवसीय भारत दौरे पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन बुधवार को अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुँचे. वो सूनामी प्रभावित देशों के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत के रूप में आए हैं. उन्होंने गृह मंत्री शिवराज पाटिल और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात की. गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने उन्हें सूनामी के दौरान सरकार के क़दमों की जानकारी दी. बाद में पत्रकारों से बातचीत में क्लिंटन ने कहा कि हमने पुनर्वास के काम को बेहतर तरीके और जल्द किए जाए के संबंध में चर्चा की. उनका कहना था कि यह सब जानते हैं कि पुनर्वास सबसे कठिन काम है. बिल क्लिंटन ने कहा कि इस आपदा के दौरान भारत सरकार ने अच्छा काम किया क्योंकि कोई बीमारी नहीं फैली और न ही कोई भूख से मरा. क्लिंटन 27 मई को तमिलनाडु के सूनामी प्रभावित नागपट्टनम क्षेत्र का दौरा करेंगे. इसके बाद क्लिंटन श्रीलंका जाएँगे. ये पूरा क्षेत्र 26 दिसंबर को सूनामी से प्रभावित रहा है. इसके पहले क्लिंटन ने सन् 2000 में भारत का दौरा किया था. सूनामी दौरा इसके पहले बिल क्लिंटन और जॉर्ज बुश सीनियर ने सूनामी प्रभावित देशों के लिए सहायता राशि जुटाने की कोशिशों के तहत श्रीलंका का दौरा किया था. सूनामी के दौरान श्रीलंका के लगभग 30 हज़ार लोगों ने जान गवां दी थी. इसके पहले जॉर्ज बुश सीनियर और बिल क्लिंटन ने इंडोनेशिया का दौरा किया था. वे थाईलैंड का दौरा कर चुके हैं जहाँ उन्होंने कहा था कि दुनिया को सूनामी प्रभावितों और पुनर्निर्माण कार्य को भुला नहीं देना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र और अमरीकी प्रशासन ने इन दोनों पूर्व राष्ट्रपतियों को सूनामी प्रभावितों के लिए धन इकट्ठा करने की ज़िम्मेदारी भी सौंपी है. |
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