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बैनर्जी समिति का कार्यकाल बढ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़रवरी 2002 में हुए गोधरा रेल अग्निकांड की जाँच कर रही यूसी बैनर्जी समिति का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. केंद्र में यूपीए सरकार के गठन के बाद रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस यूसी बैनर्जी की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया था. इस समिति ने जनवरी में अपनी अंतरिम रिपोर्ट दी थी जिसमें कहा गया था कि गोधरा में रेल में आग बाहर से नहीं लगाई गई थी. इस रिपोर्ट के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद शुरु हो गया था. ग़ौरतलब है कि गुजरात में 27 फ़रवरी 2002 को गोधरा स्टेशन के पास साबरमती रेलगाड़ी के एक डिब्बे को आग लगा दी गई थी जिसमें 59 लोग मारे गए थे और इसके बाद राज्य में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे. बैनर्जी समिति का कार्यकाल चार जून को ख़त्म हो रहा था. गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक बैठक में बैनर्जी समिति का कार्यकाल तीन महीने बढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया. सरकार की ओर से कहा गया है कि इस बढ़े हुए कार्यकाल में समिति को गोधरा कांड के सभी पहलुओं की जाँच करके अपनी रिपोर्ट को अंतिम रुप देना होगा. वैसे तो इस हादसे की जाँच नानावटी आयोग कर रहा है लेकिन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस घटना की नए सिरे से जाँच कराने के आदेश दिए थे और न्यायाधीश यूसी बनर्जी की अध्यक्षता में छह सदस्यों की एक समिति गठित की थी. |
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