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मंगलवार, 24 मई, 2005 को 06:36 GMT तक के समाचार
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बिहार में एनडीए का बंद, गिरफ़्तारियाँ
एनडीए नेता
बिहार विधानसभा भंग करने के विरोध में एनडीए ने हड़ताल आयोजित की है
बिहार विधानसभा को भंग करने के निर्णय को 'असंवैधानिक' क़रार देते हुए राष्ट्रीय लोकताँत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने मंगलवार को बिहार बंद का आयोजन किया.

इस दौरान एनडीए समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हुई और लगभग एक हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

प्रशासन ने प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी थी

साथ ही इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है.

एनडीए का मानना है कि विधानसभा भंग करने का फ़ैसला रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और लालू यादव की आरजेडी के दबाव में लिया गया है ताकि नीतिश कुमार सरकार न बना लें.

रामविलास पासवान ने कहा है,'' बिहार में सरकार के गठन न होने के लिए लालू प्रसाद यादव ज़िम्मेदार हैं.''

पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि जिस तरह बिहार विधानसभा को भंग करने में सरकार ने तेज़ी दिखाई है, वैसे ही वहाँ चुनाव कराने में भी दिखानी चाहिए.

उधर भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने इसे 1975 का दोहराया जाना बताया और कहा कि भारत एक बार फिर आपातकाल के दौर में भेज दिया गया है.

जनता दल-यू के अध्य़क्ष नीतिश कुमार का आरोप है, '' जब केंद्र को लगा कि हम सरकार बना लेंगे तो इन्होंने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई और एक साजिश के तहत विधानसभा भंग कर दी गई.”

उन्होंने बिहार के राज्यपाल को केंद्र सरकार का प्रवक्ता बताते हुए उन्हें तुरंत हटाए जाने की माँग की.

फ़ैसला

इससे पहले रविवार को देर रात तक चली कैबिनेट की बैठक में तकरीबन रात डेढ़ बजे यह निर्णय लिया गया कि बिहार विधानसभा को भंग कर दिया जाए.

 जब केंद्र को लगा कि हम सरकार बना लेंगे तो इन्होंने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई और एक साजिश के तहत विधानसभा भंग कर दी गई
नीतिश कुमार, जनता दल-यू नेता

कैबिनेट ने यह फ़ैसला राज्यपाल बूटा सिंह की रिपोर्ट के आधार पर लिया जिसमें कहा गया है कि पिछले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों में तेजी से विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त का काम चल रहा था.

इसके मद्देनज़र राज्य विधानसभा को भंग करना ही एकमात्र विकल्प था.

राज्यपाल बूटा सिंह ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में बताया, “सरकार बनाने के लिए विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त विधायकों को दूसरे राज्यों में ले जाकर हो रही थी जो कि ग़लत है और इसीलिए मैंने विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश की.”

उन्होंने कहा, “मैंने तीन महीने तक इंतज़ार किया कि तमाम राजनीतिक दल आपस में मिलें और राज्य में एक लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो पर कोई नतीजा नहीं निकला. पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम के मद्देनज़र ऐसा करना ज़रूरी हो गया था. हमारे पास और कोई विकल्प नहीं था.”

सरकार के इस फ़ैसले का वामदलों ने भी समर्थन किया है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा ने बीबीसी को बताया कि राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम के अनैतिक और असंवैधानिक हो जाने के बाद सरकार के पास कोई विकल्प नहीं था.

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