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महाविनाश के हथियार संबंधी विधेयक पेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सामूहिक विनाश के हथियार यानी डब्ल्यूएमडी और उनसे जुड़ी ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने वाले विधेयक को मंगलवार को रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने लोक सभा में पेश किया. विधेयक में कहा गया है कि भारत सामूहिक विनाश के हथियारों को असामाजिक तत्वों और चरमपंथियों के हाथों में पड़ने से रोकने के लिये वचनबद्ध है. सामूहिक विनाश के हथियार और उसके प्रक्षेपण प्रणाली विधेयक-2005 से सरकार के पास ऐसे हथियारों के प्रसार को रोकने की क़ानूनी ताकत आ जाएगी. इस विधेयक के ज़रिये महाविनाश के हथियारों से जुड़ी तकनीकि उपकरणों और अन्य सामग्री के निर्यात पर भी नज़र रखी जा सकेगी. सरकार का कहना है कि भारत के परमाणु हथियार संपन्न देश होने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कारण इस विधेयक को पेश करने की ज़रूरत महसूस हुई. विधेयक की प्रस्तावना में कहा गया है कि भारत की शुरू से ही यह नीति रही है कि किसी अन्य देश को सामूहिक विनाश के हथियार, परमाणु हथियार और ऐसे किसी अन्य विस्फोटक बनाने में मदद नहीं करेगा. साथ ही इसके माध्यम से भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पिछले साल अप्रैल में पारित किए गए प्रस्ताव का भी पालन कर सकेगा. |
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