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भारत में प्रशंसा, पाकिस्तान में आलोचना
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अधिकतर भारतीय अख़बारों ने मनमोहन-मुशर्रफ़ बातचीत की सराहना की है
भारतीय अख़बारों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की बातचीत से शांति प्रक्रिया में हुई प्रगति की सराहना की है.

पाकिस्तान में भी बातचीत की प्रशंसा की गई है लेकिन ध्यान कश्मीर के मुद्दे पर केंद्रित किया गया है और कई स्तंभकारों ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर 'धोखे' का आरोप लगाया है.

भारत में इकनॉमिक टाइम्स अख़बार की सुर्खी थी - 'मैन ऑफ़ द मैच: मुशर्रफ़.' इसके साथ ही इस समाचार पत्र में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की 16 तस्वीरें हैं. इस अख़बार का मानना है कि व्यापार संबंधों को मज़बूत करना इस बातचीत

हिंदुस्तान टाइम्स ने आगरा शिखर वार्ता का ज़िक्र करते हुए कहा - 'घोस्ट ऑफ़ आगरा बैरिड इन डैली' यानि 'आगरा का भूत दिल्ली में दफ़न.'

इस अख़बार का मानना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की दूसरी भारत यात्रा खुशी के माहौल में हुई और इससे भविष्य के लिए भी आशा जागी है. हिंदुस्तान टाइम्स का ये भी कहा है कि यदि प्रभुसत्ता जैसे मुद्दों पर धीरज से रवैया अपनाया जाए जैसा यूरोपीय संघ ने किया तो कश्मीर मुद्दे का समाधान हो सकता है.

 राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की दूसरी भारत यात्रा खुशी के माहौल में हुई और इससे भविष्य के लिए भी आशा जागी है. यदि प्रभुसत्ता जैसे मुद्दों पर धीरज से काम लिया जाए जैसा यूरोपीय संघ ने किया तो कश्मीर मुद्दे का समाधान हो सकता है
हिंदुस्तान टाइम्स

द हिंदू समाचार पत्र का कहना था कि दोनो देश 'सॉफ़्ट बार्डर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं और कश्मीर के संदर्भ में ये प्रगति का संकेत है.

एशियन एज अख़बार की सुर्खी थी - 'फॉर्वर्ड मार्च इन एप्रिल' यानि 'अप्रैल में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.'

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की सुर्खी थी - 'वॉर्म फ़ीलिंग्स, फ़र्म स्टैंड' यानि 'गर्मजोशी के साथ-साथ अपने-अपने रुख़ पर भी कायम.'

इंडियन एक्सप्रेस का कहना था - 'संडे विन फ़ॉर बोथ, वनडे विन पाक बोनस' यानि 'रविवार को दोनो की जीत, पाकिस्तान को वनडे जीत का बोनस.'

पाकिस्तान में सुर्खियाँ

पाकिस्तान के अख़बारों में भी भारत और पाकिस्तान के नेताओं की बातचीत छाई हुई है और अधिकतर सुर्खियों में कहा गया है कि शांति प्रक्रिया आगे बढ़ी है.

 जनरल मुशर्रफ़ तो संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के विकल्प सुझा रहे थे जहाँ भारत के रवैए में कोई बदलाव नज़र नहीं आया और वह अब भी पाकिस्तान पर सीमापार से चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगाता है
नवा-ए-वक़्त

लेकिन कई अख़बारों में कश्मीरियों के हितों के संदर्भ में पाकिस्तानी नीति की आलोचना की है.

नवा-ए-वक़्त ने संपादकीय में कहा - "जनरल मुशर्रफ़ तो संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के विकल्प सुझा रहे थे जहाँ भारत के रवैए में कोई बदलाव नज़र नहीं आया और वह अब भी पाकिस्तान पर सीमापार से चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगाता है."

उधर शांति प्रक्रिया के पक्षधर जंग अख़बार ने भारत के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर कायम रहने के लिए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की प्रशंसा की है.

कई पाकिस्तानी स्तंभकारों ने ये कहते हुए आलोचना की है कि इससे पाकिस्तानी नेतृत्व की हीन भावना का संकेत मिलता है.

पाकिस्तानी समाचार पत्र द नेशन का कहना था कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष कमज़ोर हुआ है.

पेशावर से छपने वाले पाकिस्तान का कहना है - "राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ताज़ा प्रस्ताव के तहत कश्मीर को किसी तरह की स्वतंत्रता की बात पाकिस्तानियों को स्वीकार्य नहीं होगी.

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