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सोमवार, 18 अप्रैल, 2005 को 22:29 GMT तक के समाचार
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18 अप्रैल 2005 का पूरा साझा बयान
भारत और पाकिस्तान के बीच 18 अप्रैल 2005 को जारी किया गया साझा बयान जिसे भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिल्ली में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की मौजूदगी में पढ़ा.

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी पूरा साझा बयान इस प्रकार है--

पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ और बेगम शीबा मुशर्रफ़ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गुरशरण कौर के मेहमान के रूप में 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक भारत में रहे.

अपनी भारत यात्रा के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भारत के राष्ट्रपति से मुलाक़ात की. उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री से भी मुलाक़ात की, उनके सम्मान में एक भोज का आयोजन किया गया. पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया आख़िरी एकदिवसीय क्रिकेट मैच भी देखा.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री ने इस यात्रा से मिले अवसर का लाभ उठाते हुए भारत-पाकिस्तान के आपसी रिश्तों की समीक्षा भी की. परस्पर विश्वास बनाने, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और आपसी संवाद के क्षेत्र में बेहतरी लाने के काम में हुई प्रगति का सकारात्मक दृष्टिकोण से जायज़ा लिया, संकल्प व्यक्त किया गया कि अब तक हुई प्रगति को आधार बनाकर आगे बढ़ा जाए.

उन्होंने (दोनों नेताओं ने) 6 जनवरी 2004 और न्यूयॉर्क में जारी किए गए 24 सितंबर के 2004 के साझा बयान के प्रति वचनबद्धता दोहराई. शांति प्रक्रिया और आपसी रिश्तों में सुधार की दिशा में अब तक हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया.

आपसी रिश्तों में बेहतरी से सुधरे माहौल और दोनों देशों के लोगों की स्थायी शांति की गहरी इच्छा के कारण जो ऐतिहासिक अवसर बना है उसे देखते हुए दोनों नेताओं ने अपनी ज़िम्मेदारी को समझते हुए इस दिशा में क़दम बढ़ाने का फ़ैसला किया है, दोनों नेताओं ने सभी मुद्दों पर सार्थक बातचीत की है. उन्हें इस बात का पक्का विश्वास है कि शांति प्रक्रिया को अब पलटा नहीं जा सकता.

इसी भावना के साथ दोनों नेताओं ने जम्मू कश्मीर के सवाल पर भी ग़ौर किया और ईमानदार, उद्देश्यपूर्ण और भविष्योन्मुख बातचीत आगे जारी रखने पर सहमत हुए जब तक समाधान न हो जाए. वे बातचीत से संतुष्ट हैं और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और लोगों तक शांति के लाभ पहुँचाने का अपना संकल्प प्रकट किया है.

वे नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ़ संपर्क और सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए जिसमें बिछड़े परिवारों, व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए मिलन-स्थल बनाने का फ़ैसला हुआ.

उन्होंने श्रीनगर मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा को बाधित करने की कोशिशों की निंदा की, बस के सफलतापूर्वक चलने का स्वागत किया. दोनों नेताओं ने संकल्प व्यक्त किया कि वे आतंकवाद को शांति प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने देंगे.

उन्होंने इस बस सेवा के अंतराल को कम करने का भी फ़ैसला किया, यह भी तय किया गया कि इस मार्ग पर ट्रकों को आने-जाने की अनुमति दी जाए ताकि व्यापार बढ़ सके. वे इस बात पर भी सहमत हुए कि पुँछ और रावलकोट सहित कई वैकल्पिक मार्ग खोले जाएँ. वे अमृतसर लाहौर के बीच बस सेवा और ननकाना साहिब जैसे तीर्थस्थलों के लिए बस सेवा के जल्दी शुरू होने का इंतज़ार कर रहे हैं.

दोनों नेता एक जनवरी 2006 से खोखरापार मुनाबाओ रेल संपर्क को दोबारा शुरू करने पर सहमत हुए हैं.

वे इस बात पर भी सहमत हुए कि मुंबई और कराची में दोनों देशों के वाणिज्य दूतावास इस वर्ष के अंत से पहले खोल दिए जाएँ.

उन्होंने दोनों देशों के विदेश सचिवों और विदेश मंत्रियों की बैठक में किए निर्णयों पर अपनी सहमति दी और इस वर्ष आगे होने वाली बैठकों की समय सारिणी को भी स्वीकृत किया. इन बैठकों में दोनों देशों में एक दूसरे के क़ैदियों की हालत सुधारने के लिए उठाए जाने वाले क़दमों पर भी चर्चा हुई.

सर क्रीक और सियाचिन विवाद के मामले में उन्होंने निर्देश दिया है कि मौजूदा कार्यविधि के तहत ही विचार-विमर्श तुरंत शुरू किया जाए ताकि दोनों मुद्दों पर दोनों देशों को स्वीकार्य समाधान मिल सके.

इस बात पर भी सहमति हुई कि दोनों देशों के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री मई में मिलकर आपसी सहयोग के मुद्दों पर चर्चा करेंगे जिसमें पाइपलाइन का मुद्दा भी शामिल होगा.

दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि व्यापारिक और आर्थिक सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के लोगों की समृद्धि बढ़ेगी और पूरे क्षेत्र में खुशहाली आएगी. दक्षिण एशिया की दो प्रमुख अर्थव्य्वस्थाओं को पूरे क्षेत्र की समृद्धि के लिए मिलकर काम करना चाहिए.

दोनों नेताओं ने निर्णय लिया कि वे संयुक्त आर्थिक आयोग को जल्द से जल्द दोबारा सक्रिय बनाएँगे. वे इस बात पर भी सहमत हुए साझा व्यापार परिषद की बैठक भी जल्दी ही होनी चाहिए.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भारत की मेहमाननवाज़ी के लिए शुक्रिया अदा किया और भारत के प्रधानमंत्री को पाकिस्तान आने का न्यौता दिया, उनके निमंत्रण को सिद्धांत रूप में स्वीकार कर लिया गया है, कूटनीतिक संपर्क माध्यम से दोनों पक्षों की सुविधानुसार इसकी तिथि तय की जाएगी.

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