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चीनी प्रधानमंत्री की बंगलौर यात्रा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन के प्रधानमंत्री विन जिया बाओ शनिवार को बंगलौर पहुँचे हैं जहाँ वे भारत की सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों का दौरा करेंगे. चीनी प्रधानमंत्री सूचना प्रौद्योगिकी की कंपनियों के अलावा रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के काम में लगे सरकारी संस्थानों में भी जाएँगे. उन्होंने कहा है कि बंगलौर की यात्रा का उद्देश्य विज्ञान और टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में भारत की प्रगति का जायज़ा लेना है. प्रधानमंत्री जियाबाओ सोमवार को दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगे. पिछले पाँच वर्षों में बंगलौर पहुँचने वाले वे तीसरे चीनी प्रधानमंत्री हैं, 2002 में बंगलौर गए चीनी प्रधानमंत्री ज़ू रॉन्गज़ी ने आईटी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी इन्फ़ोसिस को चीन में निवेश करने का निमंत्रण दिया था. चीन के प्रधानमंत्री के साथ एक 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है, चीनी प्रधानमंत्री हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स का भी दौरा करेंगे जहाँ भारत अपने हेलिकॉप्टर और हल्के विमान बनाता है. विन जिया बाओ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो भी जाएँगे जहाँ वे अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत की प्रगति से रूबरू होंगे. टाटा कन्सल्टेंसी सर्विस चीन में एक पूरी इकाई चलती है जहाँ उसने 200 लोगों को रोज़गार दे रखा है, चीनी प्रधानमंत्री बंगलौर स्थित इस कंपनी के दफ़्तर में भी जाएँगे. दिलचस्प बात ये है कि भारत चीन को सॉफ्टवेयर क्षेत्र में अपने प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता है लेकिन अँगरेज़ी जानने वाले कुशल पेशेवर लोगों की मौजूदगी के कारण भारत समझता है कि उसका पलड़ा भारी है. दूसरी तरफ़, चीन सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रगति के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहा है. भारत की लगभग एक दर्ज़न कंपनियों ने चीन में अपना कारोबार शुरू किया है लेकिन अभी तक चीनी बाज़ार का रूख़ बहुत उत्साहजनक नहीं रहा है. चीन की सिर्फ़ एक कंपनी है जो भारतीय बाज़ार में आई है, हुवाई टेक नाम की यह कंपनी बंगलौर में अपना दफ़्तर चला रही है जिसमें कुल 800 लोग काम करते हैं जिनमें से 30 चीनी हैं. चीनी प्रधानमंत्री इस कंपनी का भी दौरा करेंगे. |
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