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सोरेन के सामने बहुमत साबित करने की चुनौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड में शिबू सोरेन के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार को आज अपना बहुमत साबित करना है. लेकिन यूपीए के एक मंत्री सहित तीन विधायकों के लापता होने की चर्चा ज़ोरों पर है, झारखंड की 81 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत है. विधानसभा में शक्ति परीक्षण के ठीक एक दिन पहले शिबू सोरेन ने झारखंड के विधायकों का आह्वान किया कि वे "पार्टी लाइन से ऊपर उठकर झारखंड के विकास के लिए" उनकी सरकार का समर्थन करें. शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के राज्यपाल के निर्णय के बाद विवाद खड़ा हो गया था, राष्ट्रपति ने उन्हें दिल्ली बुलाकर निर्देश दिया था कि शिबू सोरेन के बहुमत साबित करने के लिए दिया गया समय कम किया जाए. इसके बाद, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यपाल के फ़ैसले पर कड़ी टिप्पणियाँ की हैं.
इस विवाद के शुरु होने के बाद से भाजपा ने अपने सभी 36 विधायकों को राजस्थान भेज दिया था. भाजपा विधायकों के साथ वो पाँच निर्दलीय विधायक भी हैं जिनके बारे में भाजपा का दावा है कि वे उनके पक्ष में ही मतदान करने वाले हैं. भाजपा के नेता राष्ट्रपति के सामने 41 विधायकों को पेश कर चुके हैं, राज्य में सरकार बनाने के लिए ठीक इतने ही विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है. यूपीए का कहना है कि इन निर्दलीय विधायकों को भाजपा ने ज़बर्दस्ती अपने पास रखा है और इनमें से कुछ यूपीए के पक्ष में वोट देने वाले हैं. आज होने वाले शक्ति परीक्षण के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी लेकिन माना जा रहा है कि सोरेन के बहुमत साबित करना लगभग असंभव है. इससे पहले एक विवाद प्रोटेम स्पीकर को लेकर भी हुआ था जब राज्यपाल ने सरकार से कहा था कि वह प्रोटेम स्पीकर प्रदीप कुमार बालमुचु के नाम पर पुनर्विचार करे क्योंकि वे वरिष्ठतम सदस्य नहीं हैं लेकिन सरकार ने राज्यपाल का अनुरोध ठुकरा दिया था. आदेश सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलवा दी जाए, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विश्वास मत हासिल किए जाने तक एंग्लो इंडियन विधायक के मनोनयन पर भी रोक लगा दी है. इसी आदेश के आधार पर 11 मार्च को सरकार को बहुमत साबित करना है. सुप्रीम कोर्ट ने पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाने के आदेश दिए हैं. अदालत ने विधानसभा की कार्यवाही के संबंध में 14 मार्च तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है. |
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