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भारत ने नेपाल को सैनिक सहायता रोकी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र के सत्ता पर अधिकार करने के कारण नेपाल को सैनिक सहायता देनी बंद कर दी है. काठमांडू में भारतीय दूतावास के एक प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की है. प्रवक्ता संजय वर्मा ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया,"अभी दोनों राष्ट्रों के द्विपक्षीय रिश्तों के कई पक्षों की समीक्षा की जा रही है. मगर जहाँ तक सैनिक सहायता की बात है तो उनको स्थगित कर दिया गया है". काठमांडू स्थित बीबीसी संवाददाता नवीन खडका का कहना है कि सहायता रोकने की पुष्टि भारतीय राजदूत शिवशंकर मुखर्जी के दिल्ली से काठमांडू लौटने पर की गई जो भारत सरकार से परामर्श लेने के लिए दिल्ली गए थे. भारत नेपाल को हथियारों की आपूर्ति करनेवाला एक प्रमुख राष्ट्र रहा है. भारत नेपाल को राइफ़ल, हेलिकॉप्टर, बारूदी सुरंगों से बचनेवाले वाहन और दूसरे उपकरण देता रहा है और इसमें से अधिकतर अंश सहायता के तौर पर दिया जाता है. विरोध भारत सरकार ने फ़रवरी के आरंभ में नेपाल में आपातकाल लागू करने का विरोध किया था और वहाँ तत्काल लोकतंत्र बहाल करने की माँग की थी. भारत ने हिरासत में लिए गए नेपाल के सभी राजनेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को रिहा किए जाने की भी माँग की थी. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नेपाल सरकार भारत से पकड़े गए नेपाली माओवादी नेताओं के प्रत्यर्पण की उम्मीद लगाए हुई थी. भारत ने पिछले वर्ष दो वरिष्ठ माओवादी नेताओं को तो नेपाल के हवाले कर दिया था मगर दो अन्य अभी भी भारत में ही हैं. नेपाल में राजतंत्र आने के बाद से भारत सरकार ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि वह भविष्य में नेपाली विद्रोहियों के पकड़े जाने पर क्या करेगी. इस बीच नेपाल में विद्रोहियों का चक्का जाम 10वें दिन में प्रवेश कर गया है मगर काठमांडू में खाने-पीने की कमी होने के कोई संकेत नहीं हैं. |
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