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नेपाल ने अमरीका को आश्वासन दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका का कहना है कि नेपाल नरेश ने उसे आश्वासन दिया है कि नेपाल में बहुदलीय लोकतंत्र वापसी की दिशा में सौ दिनों के भीतर कदम उठाए जाएंगे. इसके पहले अमरीका ने नेपाल को चेतावनी दी कि यदि नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को जल्द सत्ता नहीं सौंपी तो उसे मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहायता को निलंबित किया जा सकता है. अमरीका के नेपाल में राजदूत जेम्स मोरिआर्टी ने वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमरीका, यूरोपीय देशों और भारत के सैन्य सहायता में कटौती नेपाल के लिए गंभीर बात है. अमरीका ने नेपाल में हाल की गतिविधियों पर चिंता जताई है और कहा है कि राजनीतिक दलों को स्वतंत्रता पूर्वक काम करने दिया जाए. आलोचना हालांकि नेपाल ने देश में आपातकाल लागू किए जाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई आलोचना को अब तक ख़ारिज किया है. नेपाल का कहना है कि देश में माओवादी हिंसा के कारण अराजकता को फैलने से रोकने के लिए आपातकाल लागू करना ज़रूरी था. आपातकाल के विरोध में भारत, अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी, डेनमार्क और फ़्रांस ने अपने राजदूतों को चर्चा के लिए वापस बुला लिया था. नरेश ज्ञानेंद्र के सत्ता अपने हाथ में लेने का इन देशों ने विरोध किया था. भारत स्पष्ट कर चुका है कि वह नेपाल में उठाए गए कदमों का कड़ा विरोध करता है. नेपाल का बजट काफ़ी हद तक विदेशी सहायता पर निर्भर है. |
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