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नेपाल में फ़ोन संपर्क फिर कटा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल प्रशासन ने वहां की सभी फ़ोन लाइनें एक बार फिर काट दी हैं. जिस दिन नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने सत्ता पर कब्ज़ा किया था, उस दिन भी ऐसा ही कार्रवाई की गई थी. हालांकि अधिकारियों ने उसे सुरक्षा कारणों से की गई कार्रवाई क़रार दिया था. बीबीसी संवाददाता के अनुसार अब स्थिति यह है कि नेपाल में फ़ोन पर लगातार व्यस्त की घंटी बजती है. नेपाल के लोग एक बार फिर अपने परिवार और मित्रों से कटे हुए हैं. इससे आपात सेवाओं पर सबसे अधिक असर पड़ेगा और मीडिया को सूचनाएं हासिल नहीं हो पाएंगी. सेंसरशिप नेपाल में मीडिया पर सेंसरशिप पहले से ही लागू है और प्रशासन को जिन लोगों पर भरोसा नहीं है, उन्हें पहले ही गिरफ़्तार कर लिया गया है. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है कि नेपाल में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं बढ़ेंगी क्योंकि लोग सेना और माओवादियों के बीच फंस जाएंगे. हालांकि नेपाल के नवनियुक्ति प्रशासन ने कुछ राजनेताओं को रिहा कर दिया था. लेकिन कई अन्य लोगों को बिना किसी आरोपों के गिरफ़्तार कर लिया गया है. इसमें चाइल्ड वेलफेयर चेरिटी की प्रमुख गौरी प्रधान शामिल हैं. बीबीसी संवाददाता के अनुसार ऐसा लगता है कि इस कदम के जरिए अधिकारी शुक्रवार को लोकतंत्र के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन को दबाना चाहते हैं. |
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