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शंकराचार्य ज़मानत पर वेल्लूर जेल से रिहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
काँची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को सर्वोच्च न्यायालय से ज़मानत मिल जाने के बाद मंगलवार को वेल्लूर जेल से रिहा कर दिया गया. मठ के कर्मचारी शंकररमण की हत्या के मामले में उन्हें सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने ज़मानत दे दी थी. शंकराचार्य दो महीने से वेल्लूर जेल में थे. भारी भीड़ और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कालावाई मठ के लिए रवाना हुए. इससे पहले शंकराचार्य की ओर से एक स्थानीय अदालत में अग्रिम ज़मानत की अर्जी दाखिल की है. मठ के एक पुजारी तिरुकोश्तियूर महादेवन पर हमले से जुड़े मामले में गिरफ़्तारी से बचने के लिए शंकराचार्य की ओर से अग्रिम ज़मानत की अर्जी दाखिल की गई है. हत्या और हत्या के प्रयास के दो अलग-अलग मामलों में उन्हें पहले ही ज़मानत मिल चुकी है. यह मामला भी चेन्नई के विशेष जाँच दल को सौंपा जा चुका है जो शंकराचार्य से जुड़े दो अन्य मामलों की जाँच कर रहा है. कांची पीठ की ओर से बताया गया है कि शंकराचार्य कांची से 40 किलोमीटर दूर कालावाई मठ में रहेंगे. उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हत्या के मामले की जाँच पूरी होने तक शंकराचार्य के कांची मठ में प्रवेश पर रोक लगा दी है. कांची के जूनियर शंकराचार्य को भी सोमवार को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था. इस तरह अब कांचीपुरम मठ में कोई वरिष्ठ आचार्य नहीं है और ऐसा शायद पहली बार हो रहा है. जूनियर शंकराचार्य कांची मठ के पूर्व कर्मचारी शंकररमण की हत्या के मामले में सोमवार की शाम गिरफ़्तार किए गए जूनियर शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. शंकररमण की हत्या के मामले में ही शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को दो महीनों तक जेल में रहना पड़ा है. समाचार एजेंसियों के अनुसार जूनियर शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती ने कहा है कि उनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है. |
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