| शंकराचार्य की हिरासत अवधि बढ़ाई गई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
काँची की एक अदालत ने शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की हिरासत अवधि 15 दिनों के लिए बढ़ा दी है. काँची मठ के कर्मचारी की हत्या के मामले में अब वह 10 दिसंबर तक हिरासत मे रखे जा सकेंगे. चेन्नई की एक अदालत ने एक अन्य मामले में उन्हें नौ दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया है. यह मामला मठ से जुड़े एक अन्य व्यक्ति एस राधाकृष्णन पर जानलेवा हमला कराने की साज़िश करने का है. इस बीच समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शंकराचार्य ने मद्रास हाइकोर्ट में एक नई ज़मामनत याचिका दायर की है. चेन्नई की एक अदालत में भी ज़मानत याचिका दायर की गई है. हाइकोर्ट में एक बार उनकी ज़मानत याचिका रद्द की जा चुकी है. नई ज़मानत याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई होने की संभावना है. पत्र का जवाब इस बीच तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा है कि शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के ख़िलाफ़ जाँच का काम बहुत सावधानीपूर्वक चलाया जा रहा है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को उनकी हैसियत के अनुरूप सम्मान दिया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि गुरुवार को मनमोहन सिंह ने जयललिता को पत्र लिखा था कि वे इसका ख़्याल रखें कि कि काँची के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के मामले में जाँच काफ़ी सावधानीपूर्वक और सोच-समझ कर हो.
जयललिता को लिखी चिट्ठी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु सरकार से अनुरोध किया है कि वे शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें. चिट्ठी में प्रधानमंत्री ने ये भी लिखा है कि उन्हें लगता है कि तमिलनाडु पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ही शंकराचार्य की ग़िरफ़्तारी जैसा बड़ा क़दम उठाया है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा है कि क़ानून अपना रास्ता ख़ुद तय करता रहेगा और उसमें किसी तरह की दख़लंदाज़ी नहीं होनी चाहिए. |
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