| शंकराचार्य मामले पर प्रधानमंत्री का पत्र जयललिता के नाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता से कहा है वे इसका ख़्याल रखें कि कि काँची के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के मामले में जाँच काफ़ी सावधानीपूर्वक और सोच-समझ कर हो. जयललिता को लिखी चिट्ठी में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु सरकार से अनुरोध किया है कि वे शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें. प्रधानमंत्री अपने मणिपुर दौरे के समय भी यह बयान दे चुके हैं कि शंकराचार्य से जुड़ी आस्थाओं के मद्देनज़र उनसे बेहतर सलूक किया जाना चाहिए. चिट्ठी में प्रधानमंत्री ने ये भी लिखा है कि उन्हें लगता है कि तमिलनाडु पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ही शंकराचार्य की ग़िरफ़्तारी जैसा बड़ा क़दम उठाया है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा है कि क़ानून अपना रास्ता ख़ुद तय करता रहेगा और उसमें किसी तरह की दख़लंदाज़ी नहीं होनी चाहिए. जेल में बंद शंकराचार्य की न्यायिक हिरासत की अवधि शुक्रवार को ख़त्म हो रही है. कड़ा रुख़ ये चिट्ठी ऐसे समय आई है जब मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले पर कड़ा रुख़ अपनाया है और विरोध प्रदर्शन भी किया है.
सरकार की सहयोगी दल और तमिलनाडु में विपक्ष में बैठे डीएमके नेता करुणानिधि ने पिछले दिनों शंकराचार्य के मामले में राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे. इससे पहले केंद्र सरकार ने शंकराचार्य की ग़िरफ़्तारी के बारे में तमिलनाडु सरकार से पूरा ब्योरा भी मांगा था. काँची के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को तमिलनाडु पुलिस ने 11 नवंबर को पीठ के ही एक पूर्व कर्मचारी शंकररामन की हत्या के मामले में ग़िरफ़्तार किया था. कुछ दिनों पहले शंकराचार्य के ख़िलाफ़ दो साल पुराना एक और मामला दर्ज किया गया है जिसमें आरोप है कि शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने अपने पूर्व भक्त राधाकृष्णन पर जानलेवा हमला करने का आदेश किया था. शंकराचार्य इस समय न्यायिक हिरासत में वेल्लौर जेल में बंद हैं. पुलिस ने पूछताछ के लिए उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भी लिया था. |
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