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शंकराचार्य की पुलिस हिरासत नहीं बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांचीपुरम की एक अदालत ने हत्या के मामले में गिरफ़्तार शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की पुलिस हिरासत को मंगलवार तक बढ़ाने की अपील को नामंज़ूर कर दिया है. उधर सोमवार को ही मद्रास उच्च न्यायालय ने कांची शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें उन्होंने पुलिस हिरासत में दिए जाने के निचली अदालत के फ़ैसले को चुनौती दी थी. उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य को इसी महीने की 11 तारीख को कांची के एक पूर्व कर्मचारी की हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. गिरफ़्तारी के बाद उन्हें 26 नवंबर तक की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था लेकिन बाद में पुलिस ने उन्हें तीन दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेजने की अपील की जिसे कांची की निचली अदालत ने स्वीकार कर लिया. निचली अदालत के एस फ़ैसले को शंकराचार्य के वकील ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसे सोमवार को ठुकरा दिया गया. हिरासत अवधि कांची में एक प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियोग पक्ष की अपील ठुकराते हुए कहा कि शंकराचार्य से पर्याप्त पूछताछ हो चुकी है और उन्हें और एक दिन तक पुलिस हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है. अभियोग पक्ष के सरकारी वकील ने कहा था कि उन्हें कुछ बैंक दस्तावेज़ों के आधार पर पूछताछ करनी है जिसके लिए उन्हें शंकराचार्य को और एक दिन हिरासत में रखने की ज़रुरत है क्योंकि रविवार को छुट्टी थी. उधर शंकराचार्य से जुड़े दूसरे मामले में उच्च न्यायालय ने कहा कि न्यायिक हिरासत के बाद पुलिस हिरासत में भेजने का निचली अदालत का फ़ैसला ग़लत नहीं था. शंकराचार्य के वकीलों ने निचली अदालत के फ़ैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि न्यायिक हिरासत से पुलिस हिरासत में देने का फ़ैसला ग़लत था. न्यायालय ने निचली अदालत के उस फ़ैसले को भी सही ठहराया है जिसमें वकीलों को शाम छह से सात बजे के बीच ही शंकराचार्य से मिलने की अनुमति थी. उच्च न्यायालय ने कहा है कि पूछताछ के दौरान शंकराचार्य के वकील उपस्थित रह सकते हैं लेकिन न तो वे शंकराचार्य से बात कर सकते हैं, न उन्हें कोई सलाह दे सकते हैं और न ही पुलिस के किसी सवाल पर आपत्ति कर सकते हैं. |
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