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काँची पीठ के शंकराचार्य गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु पुलिस ने काँची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को हत्या के एक मामले में ग़िरफ़्तार किया गया है. गुरूवार आधी रात को तमिलनाडु की पुलिस ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के महबूबनगर ज़िले में उनको गिरफ़्तार कर लिया. शंकराचार्य को काँची कामकोटि पीठ के एक पूर्व कर्मचारी की हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया है. महबूबनगर ज़िले के एसीपी डुमास ने बीबीसी को बताया कि तमिलनाडु पुलिस का एक दल एक उप पुलिस महानिरीक्षक के नेतृत्व में महबूबनगर पहुँचा. उन्होंने बताया कि विशेष दल चेन्नई से एक विशेष विमान से चेन्नई की एक अदालत के जारी किए गए ग़ैर-ज़मानती वारंट के साथ आया था. शंकराचार्य महबूबनगर में एक औद्योगिक घराने में पूजा कराने पहुँचे थे. तीन महीने पहले तमिलनाडु में कांची पीठ के एक अधिकारी श्रीनिवास की हत्या कर दी गई थी और उसी सिलसिले में हाल में पाँच लोगों ने आत्मसमर्पण किया था. माना जा रहा है कि पूछताछ में इन्ही लोगों ने शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती और उनके भाई का नाम लिया है. दीवाली से एक रात पूर्व धर्मगुरू शंकराचार्य की इस ग़िरफ़्तारी को काफ़ी सनसनीख़ेज़ बताया जा रहा है. 1954 में काँची कामकोठी पीठ का 69 वाँ शंकराचार्च बनने से पहले जयेंद्र सरस्वती का असली नाम सुब्रहमन्यम था. 1983 में जयेंद्र सरस्वती ने शंकर विजयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था. |
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