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भाजपा से कोई उम्मीद नहीं: विहिप | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व हिंदू परिषद ने भारतीय जनता पार्टी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि पार्टी ने हिंदुओं के हितों को नज़रअंदाज़ किया. विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि भविष्य भाजपा से उसके संबंध इसी बात पर निर्भर करते हैं कि वह राम मंदिर जैसे मुद्दों पर आने वाले दिनों में क्या रूख़ रखती है. विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया ने कहा, "सत्ता में रहने के दौरान भाजपा ने हिंदुओं के लिए एक भी ऐसा काम नहीं किया जिसे वह आज गिना सके." बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में भाग लेते हुए डालमिया ने कहा, "भाजपा ने विवादास्पद तो छोड़ दीजिए, बिना विवाद वाले मुद्दों पर भी कोई काम नहीं किया. यही भाजपा की सबसे बड़ी कमज़ोरी थी जिसके वजह से हमारा और उनका टकराव बढ़ा." दरकते रिश्ते भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के रिश्तों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हमें उनसे कोई उम्मीद नहीं है, जब वे सत्ता में थे तब हमें कुछ उम्मीदें थीं लेकिन अब हम जानते हैं कि जो सत्ता में रहकर कुछ नहीं कर पाए, अब क्या करेंगे."
इसी वर्ष हुए आम चुनाव के बारे में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष ने कहा ने कहा कि "पूरे मन से किसी के लिए काम करना और आधे मन से सिर्फ़ औपचारिकता पूरी कर देने में अंतर होता है." उन्होंने कहा, "पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अधूरे मन से काम किया होगा लेकिन हमने संगठन के स्तर पर किसी से नहीं कहा था कि वे किस पार्टी के लिए काम करें, आपने देखा ही है कि इसका परिणाम क्या हुआ है." जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के रिश्ते ख़त्म हो गए हैं तो उन्होंने कहा, "अब देखना है कि भाजपा हिंदुओं और हिंदुत्व के लिए क्या करती है, उन्होंने बहुत कुछ कहा है लेकिन किया कुछ नहीं है, यही वजह है भाजपा पर विश्वास करना कठिन है." कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य की गिरफ्तारी के बारे में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष ने कहा, "हमें उन्हें गिरफ़्तार किए जाने के तरीक़े पर आपत्ति है, जब एक राजनेता गिरफ़्तार होता है तो उसे गेस्टहाउस में रखा जाता है तो उन्हें क्यों नहीं रखा जा सकता." इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद के रूख़ के बारे में सफ़ाई देते हुए डालमिया ने कहा, "हम कानूनी प्रक्रिया में दखल नहीं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें मठ में ही नज़रबंद करके भी तो रखा जा सकता था." |
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