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शंकराचार्य की ज़मानत याचिका ख़ारिज | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मद्रास उच्च न्यायालय ने कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को ज़मानत देने से इन्कार कर दिया है. शंकराचार्य को इसी महीने की 11 तारीख को हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. शनिवार को उनकी ज़मानत याचिका पर फ़ैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि उन्हें जांच के इस मोड़ पर ज़मानत नहीं दी जा सकती. अदालत ने हालांकि जयेंद्र सरस्वती को पुलिस हिरासत में भेजे जाने के कांची की निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर सोमवार तक अपना फैसला सुरक्षित रखा है. शंकराचार्य पर मठ के कर्मचारी की हत्या में शामिल होने का आरोप है. गिरफ़्तारी के बाद उन्हें 26 नवंबर तक की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. बाद में पुलिस ने उन्हें तीन दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेजने की अपील की जिसे कांची की निचली अदालत ने स्वीकार कर लिया. पुलिस फिलहाल शंकराचार्य से पूछताछ कर रही है. शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती हिंदुओं के एक बड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं. उनकी गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक दलों ख़ासकर हिदूवादी भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. पूरे देश में शंकराचार्य की गिरफ़्तारी एक चौंकाने वाली ख़बर बनी हुई है और लोग इस मामले पर नज़र रख रहे हैं. |
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