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एक अरब डॉलर से ज़्यादा का नुक़सान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार का कहना है कि दिसंबर में हिंद महासागर में आए भूकंप के कारण हुए तबाही में एक अरब डॉलर से ज़्यादा का नुक़सान हुआ है. हालाँकि अभी इसमें अंडमान निकोबार द्वीप समूह में हुए नुक़सान को नहीं जोड़ा गया है. सरकार अभी भी अंडमान निकोबार द्वीप समूह में हुए नुक़सान का आकलन कर रही है. भारत में सबसे ज़्यादा प्रभावित भी अंडमान निकोबार ही रहा है. अभी तक को आकलन किया गया है उसमें सबसे ज़्यादा नुक़सान तमिलनाडु का हुआ है. अधिकारियों ने इसे 58 करोड़ डॉलर तक का बताया है. सरकार ने राहत कार्यों को लेकर चल रही कोशिशों को अच्छा बताया और कहा कि तबाही के बाद राहत कार्यों में देरी नहीं हुई. विदेश सचिव श्याम सरन ने बताया, "हमें अपने पर पूरा भरोसा है. हमारे पास क्षमता भी है और संसाधन भी. हम इस स्थिति से निपट लेंगे." संख्या आधिकारिक तौर पर सूनामी के कारण भारत में मरने वालों की संख्या 9691 बताई जा रही है और हज़ारों अभी भी लापता हैं. तमिलनाडु के अलावा आंध्र प्रदेश, केरल और पांडिचेरी भी प्रभावित हुए हैं. बीबीसी संवाददाता डेनियल लैक ने तमिलनाडु से बताया है कि राज्य के तटवर्ती इलाक़ पूरी तरह तबाह हो गए हैं. उन्होंने बताया कि यहाँ पुनर्वास कार्यों पर सबसे ज़्यादा ख़र्च आएगा. भारत सरकार का भी कहना है कि इन इलाक़ों के मछुआरों को फिर से जीविका कमाने लायक बनाना उसकी प्राथमिकता है. अधिकारियों को उम्मीद है कि छह महीने के अंदर यह काम हो जाएगा और इसके लिए ख़र्च को आड़े नहीं आने दिया जाएगा. भारत ने सूनामी के कारण तबाही के बाद राहत कार्यों के लिए विदेशी मदद से लेने से इनकार कर दिया था. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि तमिलनाडु में राहत कार्य अच्छी तरह चल रहे हैं. हालाँकि उनका मानना है कि लंबे दौर में पुनर्वास का काम किस तरह होता है, इस पर ज़रूर नज़र रहेगी. |
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