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मंगलवार, 21 दिसंबर, 2004 को 17:34 GMT तक के समाचार
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ज़ाहिरा ने कहा, 'मैंने कुछ नहीं देखा'
ज़ाहिरा शेख़
ज़ाहिरा शेख़ ने बार-बार बयान बदले हैं
भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान बेस्ट बेकरी हत्याकाँड की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ ने 17 अभियुक्तों में से किसी को भी पहचानने से इनकार कर दिया है.

ज़ाहिरा शेख़ ने मुंबई की एक अदालत को बताया कि बेस्ट बेकरी हत्याकाँड में क्या हुआ, इस बारे में उन्हें साफ़-साफ़ कुछ याद नहीं है.

ग़ौरतलब है कि बेस्ट बेकरी में नए सिरे से 17 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुंबई की अदालत में मुक़दमा शुरू किया गया है जिसका आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था.

इससे पहले पिछले साल जून में ज़ाहिरा शेख़ सहित अनेक गवाहों ने गुजरात की एक अदालत में अपने बयान बदल दिए थे जिसके बाद सभी 21 अभियुक्तों को बरी कर दिया गया था.

बाद में ज़ाहिरा शेख़ ने कहा था कि उन्होंने किसी दबाव की वजह से अदालत में अपना बयान बदल दिया था.

उसके बाद मानवाधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से इस मुक़दमे की सुनवाई गुजरात के बाहर कराने की अपील की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में सुनवाई के आदेश दिए थे.

इस मुक़दमे के दौरान भी ज़ाहिरा शेख़ ने पिछले महीने अपना बयान फिर बदल दिया था और कहा था कि उन पर एक मानवाधिकार संगठन 'सिटिज़ंस फॉर जस्टिस एंड पीस' ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाने के लिए दबाव डाला था.

इस मानवाधिकार संगठन ने ज़ाहिरा के आरोप को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिस पर कोर्ट ने ज़ाहिरा से अपने बयान बदलने के बारे में सफ़ाई माँगी थी.

'मैं कैसे देख सकती थी?'

मंगलवार को छह प्रमुख गवाहों ने अपने बयान दिए जिनमें ज़ाहिरा शेख़, उनकी माँ और दो भाइयों ने अभियुक्तों को पहचानने से इनकार कर दिया जबकि इन लोगों ने पुलिस को जो बयान दिए थे उनमें सभी अभियुक्तों की पहचान नाम के साथ की थी.

अँधेरा था
 उस समय काफ़ी अँधेरा था और धुँआ फैला हुआ था. इसलिए मैं कैसे देख सकती थी.
ज़ाहिरा शेख़

मंगलवार को अदालत में ज़ाहिरा शेख़ ने कहा कि वह अभियुक्तों को नहीं पहचान सकती.

उन्होंने बताया कि जब समय बेकरी पर हमला किया गया तो वह अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ घर छज्जे पर थी.

ज़ाहिरा ने कहा, "हम बहुत डरे हुए थे. हर तरफ़ से पत्थर और बोतलें फेंकी जा रही थीं."

उस हमले में ज़ाहिरा शेख़ की बहन साबिरा भी मारी गई थीं. जब ज़ाहिरा से यह पूछा गया कि पत्थर कौन लोग फेंक रहे थे, तो उन्होंने कहा कि वह नहीं जानती.

"उस समय काफ़ी अँधेरा था और धुँआ फैला हुआ था. इसलिए मैं कैसे देख सकती थी."

ज़ाहिरा शेख़ की भाभी यासमीन शेख़ ने पिछले महीने बयान दिया था कि ज़ाहिरा ने रिश्वत से बदले अपना बयान बदल दिया है.

अब एक अदालत ज़ाहिरा के धन की जाँच - पड़ताल कर रही है.

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