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ज़ाहिरा शेख को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात के बेस्ट बेकरी मामले की मुख्य गवाहों में से एक ज़ाहिरा शेख को नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मुक़दमा चलाया जाए. सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार और मनवाधिकार आयोग को भी नोटिस जारी किया है. बड़ोदा के बेस्ट बेकरी मामले में ज़ाहिरा शेख अब तक तीन बार बयान बदल चुकी हैं. आख़िरी बार अपना बयान बदलते हुए ज़ाहिरा शेख़ ने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दबाव डालकर झूठी गवाही देने के लिए बाध्य किया था. इसके बाद से ज़ाहिरा शेख एक भी बार अदालत में पेश नहीं हुई हैं लेकिन तीस्ता सीतलवाड ने ज़ाहिरा शेख़ के बयान बदलने के मामले की सीबीआई से जाँच करवाने की मांग की थी. तीस्ता सीतलवाड ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की थी.
इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक पीठ ने ज़ाहिरा शेख़ को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि वे शपथ पत्र देकर बेस्ट बेकरी मामले में शामिल लोगों पर आरोप लगा रही हैं और अब वे कुछ और कह रही हैं तो उन्हें अदालत को बताना चाहिए कि उनका कौन सा बयान सही है. पीठ ने ज़ाहिरा शेख को तीन जनवरी तक इस नोटिस का जवाब देने को कहा है जबकि इस मामले की अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के ही हस्तक्षेप से बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई फिर से हो रही है और इसे मुंबई की एक विशेष अदालत में स्थानांतरित किया गया है. मामला उल्लेखनीय है कि गुजरात में दंगों के दौरान बड़ोदा की बेस्ट बेकरी में 14 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था जिसमें से 12 मुसलमान थे. इस मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान बदल देने के कारण सभी 21 अभियुक्तों को बरी कर दिया था. इसके बाद कुछ स्वंयसेवी संगठनों के हस्तक्षेप किया और ज़ाहिरा शेख ने अदालत में शपथ पत्र देकर कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक मधु श्रीवास्तव की धमकी के कारण गवाहों ने अपने बयान बदल दिए हैं. लेकिन ज़ाहिरा शेख ने नवंबर में एक बार फिर बयान बदल दिया. |
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