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बुधवार, 24 नवंबर, 2004 को 13:12 GMT तक के समाचार
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भारत के खेतों में चीनी उपकरण

चीनी उपकरण
अब भारतीय बाज़ार में बड़े पैमाने पर कृषि उपकरण लेकर आने के लिए तैयार है चीन
दुनिया के तमाम देशों सहित भारत में भी चीनी माल अपनी जगह और पहचान बना चुका है, और अब बारी खेतों की है.

जिस दिन आपको भारत के खेतों में 'मेड इन चाइना' लिखे उपकरण दिखें तो समझ लीजिएगा कि यह चौंकने का नहीं, चुनौती को स्वीकार करने का वक्त आ गया है.

अभी तक बात राखी और साबुनदानी की थी और या फिर साइकिल से लेकर सेल तक थी, पर इस बार दिल्ली में आयोजित 24वें अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में चीन से आए नए प्रतिष्ठानों ने इस बात के साफ़ संकेत दे दिए हैं कि भारत की खेती अब उन्हीं के तकनीकी हलों और थ्रेसरों से होगी.

और तो और, लगता है कि भारत के लोग आने वाले दिनों में चीन की चक्की का आटा भी खाएँगे.

 हम फिलहाल तमाम यूरोपीय देशों और अरब देशों में अपने उपकरण निर्यात कर रहे हैं. अब बारी दुनिया के सबसे बड़े बाज़ार की ओर रुख़ करने की है. अगले कुछ वर्षों में हम यहाँ भी अपनी जगह बना लेंगे
ज़ुहाई ताओ

चीन के एक ऐसे ही तकनीकी संयंत्र, एनजी फ़्लोर मशीनरी प्लाँट के सेल्स मैनेजर ज़ुहाई ताओ ने बताया, "हम फिलहाल तमाम यूरोपीय देशों और अरब देशों में अपने उपकरण निर्यात कर रहे हैं. अब बारी दुनिया के सबसे बड़े बाज़ार की ओर रुख़ करने की है. अगले कुछ वर्षों में हम यहाँ भी अपनी जगह बना लेंगे."

वे बताते हैं, "भारत के बाज़ार में जगह बनाना आसान नहीं है. इसके लिए ख़ास तैयारी करनी पड़ती है पर हमारे कम दाम और बेहतर तकनीकी के चलते यह समस्या हल हो जाती है. हमने कृषि को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाई है. हमारा प्रयास रहेगा कि कम दाम पर अच्छी तकनीकी मुहैया कराएँ."

ताओ की कंपनी आटा पीसने और तेल निकालने की 40 से भी ज़्यादा मशीनें लेकर भारत आए हैं जिसके वितरण के उन्हें अच्छे संकेत मिल रहे हैं.

अच्छी रही बानगी

उधर वितरकों ने भी इस अवसर को हाथों-हाथ लिया है. एक अन्य कंपनी के मैनेजर बताते हैं, "सुबह से कई वितरक हमारे पास आ चुके हैं. हमारा उनके साथ लगातार बैठकों का दौर चल रहा है और हमारे बीच अनुबंध भी हो रहे हैं."

चीन के उपकरण
चीन पहले से ही कई देशों को अपने उपकरण भेज रहा है

एक मोटरसाइकिल और ऑटो पार्टस् कंपनी के निदेशक तिआन-हुआ-ली ने बताया, "हमारा माल अच्छा है और सस्ता भी इसलिए ग्राहक और वितरक हमें हाथों-हाथ लेते हैं. हमारे बाज़ार में बने रहने की वजह ही यही है कि हम कम दाम पर बेहतर तकनीकी देते हैं जो शायद भारत के निर्माता नहीं कर पाते."

हालांकि वो मानते हैं कि भारत में निर्यात के लिए लिया जाने वाला निर्यात-कर अभी भी ज़्यादा है और इससे थोड़ी सी तकलीफ़ होती है.

स्टॉलों पर आए भारतीयों की जब टोह ली तो उन्होंने कहा, "ज़माना कॉम्पटीशन का है और बाज़ार में बने रहने के लिए लोग तो वही लेंगे जो सस्ता भी हो और बेहतर भी."

तो आने वाले दिन भारतीय कृषि उपकरण निर्माताओं के लिए चीन के कृषि उत्पादों के साथ प्रतियोगिता की चुनौती स्वीकार करने के होंगे.

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